लोक सभा में कांग्रेस के उप नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आशंका जताई है कि अगर पंजाब का पानी दिया गया तो प्रदेश का माहौल फिर बिगड़ सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।
वीरवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कैप्टन ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने कहा कि उमा ने बयान दिया है कि वह 45 दिनों में पंजाब-हरियाणा के पानी का मसला सुलझा लेंगे। शायद उन्हें पता नहीं है कि यह केस सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।
उमा भारती को पंजाब का इतिहास भी नहीं पता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर कई साल पहले विवाद हुआ था, पंजाब ने आतंकवाद के काले दिन देखे। उस समय मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल खुद आंदोलन का हिस्सा थे। सब कुछ जानते हुए भी बादल अब चुप हैं। उन्हें इस बयान पर पीएम और उमा भारती से ऐतराज जताना चाहिए था। पर वह दिल्ली के दबाव में पंजाब के हित बेच रहे हैं।
पंजाब में पीने और सिंचाई के लिए पानी ही नहीं है। कैप्टन ने कहा कि 2004 में उन पर पानी को लेकर दबाव पड़ा था। उस समय उन्होंने पंजाब के हित में पुराने समझौते रद्द कर दिए थे। शिअद ने भी बिल के पक्ष में वोटिंग की थी। उन्होंने कहा कि बादल को चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट में केस की मजबूत पैरवी कराएं। उन्होंने आशंका जताई कि बादल, भाजपा के दबाव में पंजाब के हितों के साथ समझौता कर सकते हैं। कैप्टन ने कहा कि कांग्रेस इसका डट कर विरोध करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने पंजाब का पानी दिया तो जोरदार आंदोलन छेड़ा जाएगा।
गिरदावरी के बाद मुआवजा नहीं देती सरकार
चंडीगढ़। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि उनके कार्यकाल में हर गिरदावरी के बाद किसानों को मुआवजा दिया गया। लेकिन सीएम प्रकाश सिंह बादल सिर्फ स्पेशल गिरदावरी कराते हैं। एक बार भी किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। बादल यहां कुछ कहते हैं, दिल्ली जाकर कुछ और करते हैं। यहां विरोध किया और संसद में भूमि अधिगृहण बिल के पक्ष में वोट डाले। उन्होंने आशंका जताई कि इस बार एफसीआई खरीद नहीं करेगी, गेहूं के रेट एमएसपी से भी नीचे जाएंगे। गुजरात के किसानों पर भी आज तक बादल ने कुछ नहीं किया।