जियोग्राफीकल इंडीकेशंस ऑफ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट 1999 के मुताबिक जीआई टैगिंग कृषि वस्तुओं के लिए जारी किया जा सकता है, जो मूलरूप से किसी देश के एक प्रदेश या क्षेत्र या राज्य से संबंधित हो। जहां ऐसी वस्तुओं की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताएं इसकी भौतिक उत्पत्ति की विशेषता को दर्शाती हों।
बासमती के लिए जीआई टैगिंग, बासमती के परंपरागत पैदावार वाले क्षेत्रों को विशेष महक, गुणवत्ता और अनाज के स्वाद पर दिया गया है, जो इंडो-गंगेटिक मैदानी इलाकों के निचले क्षेत्रों में मूलरूप से पाई जाती है। इस इलाके की बासमती की विश्व भर में अलग पहचान है।
जीआई टैगिंग जोन में नहीं आता एमपी का बासमती
कैप्टन ने कहा कि मध्य प्रदेश बासमती की पैदावार के लिए विशेष जोन में नहीं आता। यही कारण है कि मध्य प्रदेश को बासमती की पैदावार वाले मूल क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया। बासमती की टैगिंग के लिए मध्य प्रदेश के किसी भी इलाके को शामिल करने का कदम जीआई टैगिंग की प्रक्रिया और कानूनों का सीधा उल्लंघन होगा। जीआई टैगिंग इलाकों के उल्लंघन की कोई भी कोशिश, न सिर्फ भारत के विशेष इलाकों में सुगंधित बासमती पैदावार के दर्जे को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि भारतीय संदर्भ में जीआई टैगिंग के उद्देश्य को भी नुकसान पहुंचेगा।