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कैप्टन ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, मध्य प्रदेश को जीआई टैग न देने का अनुरोध, बोले- पाक को होगा फायदा

Wed, 05 Aug 2020 09:16 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पंजाब व अन्य राज्यों के हित में मध्य प्रदेश की बासमती को भौगोलिक सांकेतक दर्जा (जियोग्राफीकल इंडीकेशन टैगिंग) न देने के लिए निजी दखल की मांग की। इस समय पंजाब के अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ जिलों को ही बासमती की जीआई टैगिंग मिली है।

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मुख्यमंत्री ने ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा मध्यप्रदेश के किसी भी दावे पर विचार करने का जोरदार विरोध करते हुए कहा है कि ऐसा करने से भारत की निर्यात क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। भारत हर साल 33,000 करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात करता है लेकिन भारतीय बासमती के रजिस्ट्रेशन में किसी तरह की छेड़छाड़ से बासमती की विशेषताएं और गुणवत्ता पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मार्केट में पाकिस्तान को फायदा हो सकता है।

पत्र में मुख्यमंत्री ने जीआई टैगिंग के आर्थिक और सामाजिक महत्व से जुड़े मुद्दे की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की बासमती को जीआई टैगिंग देने से पंजाब के कृषि क्षेत्र और भारत के बासमती निर्यातकों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। मध्य प्रदेश ने बासमती के लिए जीआई टैगिंग में अपने 13 जिलों को शामिल करने की मांग की है। 

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खाद्य वस्तुओं पर ऐसे होती है जीआई टैगिंग

जियोग्राफीकल इंडीकेशंस ऑफ गुड्स (रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन) एक्ट 1999 के मुताबिक जीआई टैगिंग कृषि वस्तुओं के लिए जारी किया जा सकता है, जो मूलरूप से किसी देश के एक प्रदेश या क्षेत्र या राज्य से संबंधित हो। जहां ऐसी वस्तुओं की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताएं इसकी भौतिक उत्पत्ति की विशेषता को दर्शाती हों।

बासमती के लिए जीआई टैगिंग, बासमती के परंपरागत पैदावार वाले क्षेत्रों को विशेष महक, गुणवत्ता और अनाज के स्वाद पर दिया गया है, जो इंडो-गंगेटिक मैदानी इलाकों के निचले क्षेत्रों में मूलरूप से पाई जाती है। इस इलाके की बासमती की विश्व भर में अलग पहचान है।

जीआई टैगिंग जोन में नहीं आता एमपी का बासमती
कैप्टन ने कहा कि मध्य प्रदेश बासमती की पैदावार के लिए विशेष जोन में नहीं आता। यही कारण है कि मध्य प्रदेश को बासमती की पैदावार वाले मूल क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया। बासमती की टैगिंग के लिए मध्य प्रदेश के किसी भी इलाके को शामिल करने का कदम जीआई टैगिंग की प्रक्रिया और कानूनों का सीधा उल्लंघन होगा। जीआई टैगिंग इलाकों के उल्लंघन की कोई भी कोशिश, न सिर्फ भारत के विशेष इलाकों में सुगंधित बासमती पैदावार के दर्जे को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि भारतीय संदर्भ में जीआई टैगिंग के उद्देश्य को भी नुकसान पहुंचेगा।
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