पंजाब के चार हजार से अधिक एससी एसटी विद्यार्थियों के लिए खुशखबरी है। उनको डिग्रियां व डिप्लोमा लेने में कोई दिक्कत नहीं होगी। उनकी छात्रवृत्ति की बकाया रकम पंजाब सरकार पंजाब यूनिवर्सिटी को देने को तैयार हो गई है। 15 करोड़ रुपये जुलाई से पहले पीयू के खाते में पहुंच जाएंगे। जानकारी के अनुसार पीयू एससी एसटी के विद्यार्थियों को बिना फीस के एडमिशन नहीं देने का प्लान बना रहा था, पता लगने के बाद सरकार बैकफुट पर आई गई। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की रकम केंद्र सरकार विद्यार्थियों के खातों में भेजती है, लेकिन पंजाब में छात्रवृत्ति छात्रों के पास सीधे नहीं जाती।
केंद्र सरकार पंजाब सरकार को छात्रवृत्ति की रकम देती है और पंजाब सरकार जहां पर विद्यार्थी पढ़ते हैं उन शिक्षण संस्थानों को रकम भेजती है। लेकिन पिछले चार साल से स्कॉलरशिप पंजाब के 170 से अधिक कॉलेजों के पास नहीं पहुंची। 15 करोड़ रुपये से अधिक बकाया हो गया। कॉलेजों ने पीयू को पैसे नहीं दिए तो पीयू ने सभी विद्यार्थियों की डिग्रियों पर रोक लगा दी थी। छात्रों की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो हड़कंप मच गया। सरकार ने पीयू से कहा कि वह जल्द ही रकम जारी कर देंगे। चुनाव के कारण रकम जारी नहीं हो सकी।
माना जा रहा है कि जुलाई से पहले रकम पीयू के खाते में पहुंच जाएगी। सूत्रों का कहना है कि पीयू ने योजना बनाई थी कि इस बार पंजाब के एससी एसटी के विद्यार्थियों को मुफ्त में दाखिले नहीं दिए जाएंगे। पंजाब सरकार पर बकाया अधिक हो गया था। ऐसे में छात्रों से प्रवेश फीस ली जाएगी। इसकी जानकारी पंजाब सरकार को लगी तो सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा और उन्होंने पीयू को रकम देने का आश्वासन दिया। हालांकि पीयू ने अपने कैंपस के विद्यार्थियों के लिए डिग्रियां देने का काम शुरू कर दिया था और पंजाब के कॉलेजों के छात्रों को विशेष दशा में डिग्री देने के निर्देश दिए गए थे।
सीनेट में आ रहा यह एजेंडा
पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप का एजेंडा 26 मई को होने जा रही सीनेट की बैठक में आ रहा है। इस पर बहस होगी। जानकारों का कहना है कि पीयू निर्णय लेगा कि यदि जुलाई तक पंजाब सरकार रकम नहीं देगी तो फिर एससी एसटी के छात्रों को प्रवेश में दिक्कतें होंगी। हालांकि सरकार ने इसके लिए आश्वासन दिया है।
पंजाब सरकार ने भरी हामी
पंजाब सरकार ने स्कॉलरशिप की रकम देने के लिए हामी भरी है। जल्द ही रकम पंजाब यूनिवर्सिटी को मिलेगी।
- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू