पंजाब यूनिवर्सिटी को बाहरी वाहन मुक्त बनाने की योजना शुक्रवार से शुरू हुई। पहले दिन नॉर्थ कैंपस सेक्टर-14 के तीनों गेट पर इसको लेकर असमंजस की स्थिति रही। वाहन चालकों की सिक्योरिटी के साथ नोकझोंक होती रही। कुछ ऐसे वाहन भी कैंपस में आते हैं, जो हैं तो पुराने स्टूडेंट या स्टाफ के, लेकिन उनके पास स्टीकर नहीं है। पंजाब यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने योजना बनाई है कि कैंपस में नए सेशन से नए स्टूडेंट गाड़ी लेकर नहीं आ सकेंगे।
पुराने छात्रों और शिक्षकों पर ऐसा कोई बैन नहीं होगा और वे गाड़ी कैंपस में ला पाएंगे, लेकिन उस पर पीयू प्रबंधन से जारी स्टीकर होना चाहिए। इसके लिए शुक्रवार से ही ट्रायल शुरू हो गया। अब आननफानन में यह योजना लागू तो कर दी गई, लेकिन इसकी तैयारी नहीं की गई। कई विभागों के पुराने स्टूडेंट्स को स्टीकर ही नहीं दिए गए। पीयू ने नया नियम तो सेक्टर-14 कैंपस में लागू किया, लेकिन सेक्टर-25 साउथ कैंपस में कई बड़े विभाग हैं,
जिन स्टूडेंट्स को लाइब्रेरी, अकादमिक कार्य और स्टूडेंट सेंटर पर आना होता है जबकि स्टूडेंट्स के पास स्टीकर नहीं हैं। ऐसे में यूआईटी के स्टूडेंट्स ने इसका विरोध भी जताया कि उनकी गाड़ी नॉर्थ कैंपस में नहीं आने दी गई, जबकि वे पुराने स्टूडेंट हैं। उन्हें स्टीकर भी नहीं दिया गया। जब वे सिक्योरिटी और अपने विभाग से स्टीकर लेने गए तो उन्हें कहा गया कि अभी वे उपलब्ध नहीं हैं।
क्या कहते हैं स्टूडेंट्स
अगर इस योजना को लागू करना था, तो पहले सभी पुराने स्टूडेंट्स को उनके वाहन के लिए स्टीकर दिया जाना था। अब साउथ कैंपस में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को तब तक परेशान होना होगा, जब तक स्टीकर बनाकर उन्हें नहीं मिलते।
- चेतन चौधरी, कैंपस प्रधान, सोई
नॉर्थ कैंपस में कई जरूरी काम होते हैं। अब जिनके पास अपनी गाड़ी हैं वे कहां ई-रिक्शा का इंतजार करेंगे, जोकि साउथ कैंपस में इतने ज्यादा हैं भी नहीं। योजना को जल्दबाजी में लागू कर दिया गया।
- परम सिंह, यूआईईटी
ई-रिक्शा और शटल बस सर्विस अभी बड़े स्तर पर नहीं चल रही। अब साउथ कैंपस से तो अपने वाहन पर ही नॉर्थ कैंपस आना होता है, लेकिन स्टीकर के बगैर कैसे आएं? पुराने स्टूडेंट्स को जल्द से जल्द स्टीकर मिलने चाहिएं, ताकि रोजाना इस समस्या से न जूझना पड़े।
- सुमन लाखयान, यूआईईटी