लॉकडाउन के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाने का एक ही तरीका है वह है ऑनलाइन। यह तरीका फेल न हो और इसमें लापरवाही न बरती जाए, इसके लिए यूजीसी को समय-समय पर इस बात से अवगत कराना होगा कि विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई बेहतर ढंग से चल रही है।
अगर इस दौरान कोई बड़ी बाधा आ रही हो और उसका निराकरण नहीं हो पा रहा हो तो उसके बारे में भी यूजीसी को अवगत करना होगा। बता दें कि पीयू में 60 फीसदी शिक्षकों ने ऑनलाइन पढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। बाकी शिक्षक इसका प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रशिक्षण के बाद वह भी ऑनलाइन पढ़ाने का काम शुरू कर देंगे।
फिलहाल लॉकडाउन 14 अप्रैल तक है। यह बढ़ेगा या घटेगा, इस पर अभी कुछ तय नहीं है लेकिन यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को साफ आदेश दे दिए हैं कि वह ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवा दें ताकि विद्यार्थियों को नुकसान न हो और उनका भविष्य प्रभावित न हो। इसी को ध्यान में रखते हुए पीयू ने अपने शिक्षकों को निर्देश जारी कर दिए कि इस पर तेजी से अमल किया जाए।
कुछ शिक्षकों ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करवा दी तो कुछ के पास संसाधन कम थे जबकि कुछ के पास ऑनलाइन पढ़ाने की जानकारी कम थी। इसी को ध्यान में रखकर पीयू की ओर से शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। धीरे-धीरे शिक्षक सीख भी रहे हैं। जैसे ही प्रशिक्षण पूरा होगा तो बाकी शिक्षक भी ऑनलाइन पढ़ाने का काम शुरू करेंगे।
उसके बाद इसकी रिपोर्ट यूजीसी को जाएगी। इसके अलावा डिग्री कॉलेजों में भी ऑनलाइन पढ़ाई का काम चल रहा है लेकिन गति वहां भी नहीं पकड़ रही है। कभी नेटवर्क की दिक्कतें हैं तो कुछ विद्यार्थियों के पास ऑनलाइन पढ़ने के साधन नहीं हैं।
इसलिए ऑनलाइन पढ़ाना पीयू के लिए जरूरी
यूजीसी की ओर से दो दिन पहले एक एडवाइजरी कमेटी बनाई गई थी। यह कमेटी नए शैक्षिक सत्र के शुभारंभ से लेकर परीक्षाएं आयोजित करने समेत कई निर्णय लेगी। इस कमेटी में पीयू वीसी प्रो. राजकुमार हैं। अब उनके सामने चुनौती यह है कि पीयू ऑनलाइन पढ़ाई में कितना सफल हो पाता है।
क्योंकि बनाई गई कमेटी के निर्णय हर किसी को मानने होंगे और ऐसे में पीयू पीछे रह जाता है तो फिर दिक्कतें खड़ी होंगी। हालांकि पीयू ने ऑनलाइन पढ़ाई में काफी हद तक सफलता पाई है। साथ ही यहां के शिक्षक दूसरे विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को भी ट्रेंड कर रहे हैं।