पंजाब में मतदान का काउंटडाउन शुरू हो गया है। अब तीन दिन बचे हैं। लेकिन अब पंजाब के चुनाव फिर मुद्दों से भटक गए हैं। नेताओं को आरोप प्रत्यारोप और निजी बयानबाजी से फुर्सत नहीं मिल रही है। पंजाब के संगीन मुद्दों पर कोई बहस या बयानबाजी नहीं हो रही है। पीएम मोदी जालंधर में रैली करके पंजाब के सुलगते मुद्दों को टच कर गए पर इनका समाधान और रोड मैप तक साफ नहीं किया। पंजाब के सुलगते मुद्दों पर चार माह पहले ही राजनीति शुरू हुई थी पर अब सियासत में मुद्दे गायब हो गए हैं।
नशा सबसे बड़ा मुद्दा
पंजाब में नशा सबसे बड़ा मुद्दा है। एक साल में एक हजार किलो हेरोइन पाकिस्तान से धकेली जा रही है। नशे की दलदल में पंजाब धंसता जा रहा है। पंजाब में सीमा पार से हेरोइन की खेप आ रही है। युवा नशे की दलदल में धंसते जा रहे हैं। वर्ष 1980 के बाद शुरू हुए ड्रग के चलन को किसी ने नहीं रोका। नशे ने बड़ी आबादी को चपेट में लिया तो इसकी ओर वर्ष 2011 में तत्कालीन डीजीपी शशिकांत का ध्यान गया। प्रदेश में हालात यह है कि नशे से आर्थिक और सामाजिक नुकसान सूबे को झेलना पड़ रहा है। एक बड़ा वर्ग नशे से प्रभावित हुआ तो सियासी पार्टियों ने लोगों की नब्ज पकड़ी। इसलिए चुनावों में इसे भावनात्मक मुद्दा बनाना शुरू किया। चुनाव में मुद्दा गर्माने के लिए आरोप प्रत्यारोप खूब चलता है और बाद में माफी मांग कर खत्म कर देते हैं। केजरीवाल ने इसी प्रकार बिक्रम मजीठिया पर वर्ष 2017 में आरोप लगाया और चुनाव के बाद माफी मांग ली। वर्ष 2017 के चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मुद्दे को जमकर उछाला और गुटका साहिब की कसम खाकर नशे की 4 सप्ताह में कमर तोड़ने की बात कही थी। चुनावों से पहले नशे को लेकर पंजाब में सियासत शुरू हुई थी अब मुद्दा गायब हो गया है। पंजाब का हर छठा व्यक्ति (41 लाख लोग) नशे का आदी है। 22 लाख लोगों को शराब और 2.70 लाख लोगों को अफीम, चूरा-पोस्त, हेरोइन की लत है। पीएम मोदी ने जालंधर में भाषण के दौरान कहा कि नया पंजाब बनेगा तो नशामुक्त होगा।
पंजाब का कर्जा बढ़ता जा रहा है
पंजाब पर तीन लाख करोड़ का कर्जा सिर चढ़ चुका है, पंजाब कर्जे की दलदल में डूबता जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 8 साल में पंजाब के कर्ज का मर्ज बढ़ता ही जा रहा है। 2016-17 में प्रदेश पर 1.82 लाख करोड़ का कर्ज था। 2017-18 में 1.95 लाख करोड़ हो गया। 2018-19 में 2.11 लाख करोड़ हो गया तो फिर 2019-20 में बढ़कर यह बोझ 2.28 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड किया गया। अगले वित्त वर्ष 2020-21 में यह बढ़कर 2,52,880 करोड़ रुपये हो गया और अब 2021-22 में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब के कर्ज को लेकर चीखते रहे और रोड मैप लाते रहे। वह हाशिये पर चले गए और सियासत से मुद्दा गायब हो गया है। पीएम मोदी भी घोषणा करके गए हैं कि नया पंजाब कर्ज मुक्त होगा।
पंजाब से 27 हजार करोड़ रुपये विदेशों में जाते हैं हर साल
पंजाब से युवाओं का पलायन तेजी हो रहा है, मामला सियासत से निकल चुका है। पंजाब से हर साल 1.5 लाख युवा विदेशों का रुख कर रहे हैं। पंजाब से हर साल 27 हजार करोड़ रुपये बच्चों को विदेश भेजने और पढ़ाने में खर्च हो रहे हैं। हर साल तकरीबन सवा लाख युवा कनाडा और तकरीबन 25 हजार अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों का रुख कर रहे हैं।
पंजाब में पानी का मुद्दा, 400 फीट पानी नीचे गया
पंजाब का भू-जल स्तर गंभीर स्थिति में पहुंच रहा है। जिससे तेजी से जलस्तर गिर रहा है। उससे 18 साल बाद सूबे की धरती के नीचे 5 फीसदी इलाके में पानी बचेगा, लाखों ट्यूबवेल सूख चुके हैं। इससे खेती तो बर्बाद होगी, घरों में भी पानी सप्लाई का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। पंजाब सॉयल कंजर्वेटर और सेंट्रल अंडर ग्राउंड वाटर लेवल बोर्ड के एक सेटेलाइट सर्वे में सामने आया है कि वर्ष 1985 में पंजाब बेहतर स्थिति में था। 85 प्रतिशत इलाके में भू-जल स्तर सही था पर 2018 तक ये तेजी से गिरा। करीब 45 फीसदी इलाके में भू-जल कम हो गया, छह प्रतिशत इलाकों में तो भू-जल खत्म ही हो गया। विशेषज्ञों की मानें तो यही हाल रहा तो साल 2037 तक पंजाब के 5 प्रतिशत इलाके में भी भू-जल नहीं बचेगा। हालात यह हो गए हैं कि कई जगह पर 300 से 1000 फीट गहराई तक बोर कर पानी निकाला जा रहा है।
पंजाब में कैंसर तेजी से फैल चुका है
पानी में कीटनाशक के अधिक प्रयोग से कैंसर फैल गया। राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को देखते हुए अबोहर-जोधपुर पैसेंजर ट्रेन को ‘कैंसर ट्रेन’ का नाम दिया गया था। मौजूदा समय में पंजाब में एक लाख लोगों पर 90 मरीज कैंसर से पीड़ित हैं। पिछले 7 सालों की बात करें तो हर साल औसतन 7500 नए मामले आ रहे हैं। कैंसर से पंजाब को कैसे बचाना है ? सियासदान इस मुद्दे से दूर जा चुके हैं।
बेअदबी के मुद्दों पर आज भी लोग इंसाफ का इंतजार
पंजाब के 2017 के विधानसभा चुनाव श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी और निहत्थी सिख संगत पर गोलियां चलाने की दर्दनाक घटनाएं चुनावी मुद्दा था। 2015 में घटी इन दर्दनाक घटनाओं में सात साल बाद भी संगत इंसाफ के लिए तरस रही है। इन सात सालों में आयोग से लेकर सीबीआई और एसआईटी के बार बार गठन के बावजूद इंसाफ नहीं मिला।
पाक से सटा पंजाब, आतंकवाद का खतरा मंडरा रहा
पाक सीमा से सटे पंजाब में आतंक का खतरा मंडरा रहा है। पाक से टिफिन बम ड्रोन से भेजे जा रहे हैं। पाकिस्तान से सटे पंजाब के इलाकों में पिछले काफी समय से ड्रोन के माध्यम से हथियारों की सप्लाई होने से सुरक्षा चुनौती पैदा हो गई है। 2019 से ही पाकिस्तान ड्रोन के माध्यम खतरनाक हथियारों और विस्फोटकों की सप्लाई कर रहा है। पंजाब की 553 किलोमीटर सीमा पाकिस्तान के साथ सटी है। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्का और फिरोजपुर जिलों की सीमा पाकिस्तान से लगती है। 149 किलोमीटर की सीमा तो ड्रोन घुसपैठ के लिहाज से अति संवेदनशील है। यह मुद्दा भी चुनावों से दूर हो चुका है।