कर्मचारियों की पेंशन व अन्य लाभ में 142.28 लाख का अंतर मिला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कैग ने हरियाणा खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड की साल 2020 की रिपोर्ट पेश की। इस दौरान कैग ने कई वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है। कैग ने पाया कि बोर्ड ने अपने कर्मचारियों की पेंशन व अन्य सेवानिवृत्ति लाभ बैंक में जमा करती है, लेकिन इसमें करीब 142.28 लाख रुपये का अंतर मिला है। इसका आज तक मिलान नहीं हो सका है।
कैग के मुताबिक खादी विकास और ग्रामोद्योग आयोग की योजना के मुताबिक करीब 5.34 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया था, लेकिन इस राशि को वसूला नहीं गया। यह राशि छह साल से बकाया है। अब इस राशि की वसूली की संभावना कम है। बोर्ड को इन बकाया ऋणों के लिए प्रावधान करना चाहिए था। खादी बोर्ड की मार्केटिंग इकाई साल 2008 से निष्क्रिय है। बोर्ड की करीब 222.83 लाख रुपये की राशि सरकारी लेनी है और 173.83 लाख की रुपये की राशि देनी है। लेकिन यह राशि किस समयावधि की बकाया है। इसका वास्तविक समय कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से आंकड़ों की सत्यता प्रमाणित नहीं की जा सकी। इस मुद्दे को अलग-अलग कैग की रिपोटों में समय-समय पर उठाया गया, लेकिन बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
खादी विकास और ग्रामोद्योग आयोग की एक इकाई जून 2003 में बंद हो गई थी। इकाई की बैलेंस शीट में दिखाए गए देनदार साल 2003 पहले से हैं। यह राशि करीब 3.58 लाख है। चूंकि देनदार 2003 के पहले के हैं और 17 साल बीत चुके हैं। ऐसे में वसूली की संभावना दूर-दूर तक नहीं है। वहीं, कैग ने यह भी पाया कि बोर्ड की कोई आंतरिक ऑडिट सिस्टम नहीं है। नकद, स्टॉक और अन्य मूल्यवान कामों को निपटाने वाले कर्मचारियों का कोई रेटेशन तैयार नहीं किया गया है। अचल संपत्तियों का साल 2015-16 के बाद से कोई भौतिक सत्यापन नहीं किया गया है।