पंजाब विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी की एक दिग्गज मंत्री के तीन खास रिश्तेदार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। पढ़िए उनसे बातचीत के कुछ अंश। बात हो रही है, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल। वे इन दिनों चुनाव प्रचार में बेहद व्यस्त हैं।
उनके ससुर प्रकाश सिंह बादल लंबी से, पति सुखबीर सिंह बादल जलालाबाद से और भाई बिक्रम सिंह मजीठिया मजीठा से मैदान में हैं। खुद मैदान में न होने के बावजूद हरसिमरत प्रचार में बिजी हैं।
रोजाना ही रैलियों और जनसभाओं में पंजाब सरकार का बखान कर पति-ससुर और भाई के लिए वोट मांग रही हैं। हालांकि रैलियों में कई बार सुखबीर बादल से ज्यादा वे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की तारीफ करती दिखती हैं।
पिछले दिनों फरीदकोट में पीएम मोदी की रैली में भी उन्होंने ससुर की तारीफों के पुल बांध दिए। इस बारे में सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके ससुर की कार्य के प्रति समर्पण भावना ही है कि वे तो क्या जो भी उनसे मिलता है, उनसे प्रभावित हो जाता है। ऐसे में उन्हें अपने ससुर से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
इतने बिजी शेड्यूल में घर-राजनीति ऐसे मैनेज करती हैं
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल
- फोटो : File Photo
जब माता-पिता दोनों कामकाजी हों तो बच्चे तो उपेक्षित होते ही हैं, लेकिन देश के प्रति सेवा भावना हो तो कुछ कुर्बानी तो देनी ही पड़ती है। वे तड़के उठती हैं और उसके बाद पंज बाणियों का पाठ करती हैं और स्वयं गुरु साहिब के लिए भोग तैयार करके भोग लगाकर बर्तन भी खुद ही साफ करती हैं। इससे ही उन्हें सारा दिन प्रसन्नता और एनर्जी मिलती है।
बच्चियां सुरक्षित कैसे होंगी
2008 में नन्हीं छांव अभियान शुरू किया था, लेकिन आज के समय में बच्चियों की असुरक्षा को देखते हुए अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बेटों को धर्म सिखाएं। धर्म से ही संस्कार आते हैं। बच्चियां भी खुद को किसी से कम न समझें, तभी वे सुरक्षित रह पाएंगी।
पार्टियों की खींचतान कहां तक उचित है?
केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल
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जनता की सुनकर उसका समाधान करने के बजाय एक-दूसरे पर कटाक्ष करने में ऊर्जा व्यर्थ गंवाना उचित नहीं है। इसकी बजाय आप खुद इतनी तेज दौड़ें, पॉजिटिव काम करें कि दूसरे से आगे निकल जाएं।
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कम क्यों हैं?
इसके लिए महिलाओं को आगे आना होगा। मन से डर निकालना होगा और अपने अंदर जीत का जज्बा पैदा करना होगा। जब तक महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़ नहीं जाती उनकी 33 प्रतिशत आरक्षण जारी रहनी चाहिए।