चंडीगढ़। ट्राइसिटी के कैब चालकों ने बुधवार को कैब ऑपरेटर्स सोशल वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले सेक्टर-18 स्थित एसटीए ऑफिस का घेराव किया और रोष प्रदर्शन किया। कैब ऑपरेटर्स का कहना है कि कई एग्रीगेटर कंपनियां निजी नंबर प्लेट व टेंपरेरी नंबर प्लेट की गाड़ियों को भी टैक्सी व बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति दे रही हैं। इस पर रोक लगनी चाहिए।एसोसिएशन के प्रधान अमनदीप सिंह ने कहा कि वह पिछले काफी समय से इन मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। पहले हड़ताल व प्रदर्शन भी किया था। प्रशासन के आश्वासन के बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त की थी, लेकिन बावजूद इसके अभी तक उनकी मांगें नहीं मानी गई हैं। उन्होंने न्यूनतम किराया तय करने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि कंपनियां बिना किसी रोक-टोक के शहर में काम कर रही हैं। ये जनता के लिए खतरा तो है ही, टैक्स न देकर सरकार को भी नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि वह ईमानदारी से टैक्सी चलाकर अपने परिवार का गुजारा चला रहे हैं, वे बेहद परेशान हैं। अधिकारियों को पहले ही सभी तरह की जानकारी दी जा चुकी हैं, बावजूद इसके कई महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कहा कि निजी नंबर के वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन फिर भी कंपनियां मनमाने तरीके से इन्हें कैब चलाने की अनुमति दे रही हैं। कार्रवाई न होने के चलते चंडीगढ़ टैक्सी चालकों को भूखे मरने की नौबत आ चुकी है।
एसटीए ने दो अन्य कंपनियों को जारी किया लाइसेंस
एसटीए रूपेश कुमार ने बताया कि उन्होंने रैपिडो और इनड्राइव को भी लाइसेंस जारी कर दिया है। इन कंपनियों की तरफ से हाल ही में लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया था, जिसके बाद ही विभाग की तरफ से लाइसेंस जारी किया गया है। फिलहाल कंपनियों की तरफ से जिन वाहनों की लिस्ट उन्हें प्रदान की गई है, उनमें बाइक टैक्सी नहीं है। हालांकि, रैपिडो चाहता है कि बाइक टैक्सी चलाई जाएं। इसके लिए उन्हें कहा गया है कि वह कॉमर्शियल नंबर प्लेट के साथ ही ऐसा कर सकते हैं। बता दें कि इनसे पहले ओला और उबर को भी लाइसेंस दिया गया है।