लोगों को एन्जियोप्लास्टी या बाइपास सर्जरी के लिए पीजीआई और जीएमसीएच चंडीगढ़ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सिविल अस्पताल में ही करा सकेंगे। एक दिसंबर से जिला अस्पताल में बाइपास सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। यह सुविधा लोगों को जनरल अस्पताल में खुल रहे कैथ लैब में मिलेगी।
पीपीपी मोड यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप से यह संभव होगा। सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (सीजीएचएस) के तहत तकरीबन आधे रेट पर लोगों यह सुविधा मुहैया कराई जाएगी। पंचकूला के अलावा हरियाणा के तीन जिलों में लोगों को कैथ लैब की सुविधा मिलेगी।
हरियाणा के चार सिविल अस्पतालों में खुलेगा कैथ लैब
प्रदेश के चार सिविल अस्पतालों मे कैथ लैब की सुविधा शुरू की जाएगी। इसमें पंचकूला, अंबाला, फरीदाबाद, गुड़गांव के सिविल अस्पताल शामिल हैं।
बाहर डेढ़ लाख अस्पताल में सिर्फ साठ हजार
बाइपास सर्जरी के लिए अभी लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जनरल अस्पताल में बाइपास सर्जरी की सुविधा मात्र साठ हजार रुपये में मिलेगीे।
कैथ लैब में 20 बेड का बनेगा सीसीयू वार्ड
जनरल अस्पताल में 20 बेड का सीसीयू वार्ड भी बनाया जाएगा। इसकी सुविधा भी लोगों को कैथ लैब में पीपीपी के तहत ही दी जाएगी।
इन्हें मिलेगी फ्री सुविधा
कुछ कैटगरी को फ्री बाइपास सर्जरी की सुविधा मिलेगी। इनमें बीपीएल कार्ड धारक, अर्बन स्लम एरिया के मरीज, शेड्यूल कास्ट, दिव्यांग भत्ता पाने वाले शामिल हैं।
क्या है बाइपास सर्जरी
जब दिल बीमार हो जाता है तो उसके उपचार के लिए हम कई तरीके आजमाते हैं। यानी जांच के बाद चिकित्सक यह निर्धारित करता है कि मरीज को दिल से संबंधित क्या समस्या है और इसके उपचार के लिए उसे किस तरह का ट्रीटमेंट दिया जाए। बाईपास सर्जरी भी दिल के लिए की जाती है।
दरअसल दिल से जुड़ी तीन नसें होती हैं और इनमें से किसी भी नस में रुकावट हो सकती है। बाइपास सर्जरी के जरिए रुकावट वाली नसों की को हटाया जाता है। कई बार तो इसके लिए तीनों नसों को हटाया जाता है। बाईपास सर्जरी के लिए मरीज के शरीर की नसें ही बदली जाती हैं,ये नसें शरीर कि किसी भी हिस्से यानी पैर, हाथ, सीना, कंधा आदि की हो सकती हैं।
इन स्थितियों में बाइपास सर्जरी जरूरी होती है
1. जब एंजियोग्राफी से यह पता चले कि मरीज को कभी भी दिल का दौरा पड़ सकता
है। मरीज के सीने में दर्द उठने के कम से कम छह घंटे पहले ही बाईपास
सर्जरी कर दी गई हो। हृदय को दिल के दौरे से होने वाले नुकसान से बचाया
जा सकता है।
2. दिल के दौरे से उबरने के बाद भी सीने में दर्द कायम रहने अथवा मरीज की
हालत गंभीर रहने पर।
3. एंजाइना के लक्षण नहीं होने पर भी जब ईसीजी स्ट्रेस टेस्ट और कोरोनरी
एंजियोग्राफी से पता चले कि मरीज की कई धमनियों में रुकावट है।
कैथ लैब की सुविधा हरियाणा के चार जिलों में शुरू की जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर शुरू हो चुका है। दिसंबर लोगों को यह सुविधा मिलेगी।
- डॉ. एमपी शर्मा, स्टेट नोडल ऑफिसर हरियाणा