वहां दिल्ली रेलवे स्टेशन से ही मुरलीधर अग्रवाल गुम हो गए थे। बाद में करीब 9 साल पहले सड़क पर घूमते हुए मानसिक रूप से विक्षिप्त मुरलीधर अग्रवाल सोनीपत में विशेष बच्चों का कोशिश स्कूल चलाने वाले कोशिश चैरीटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन जितेंद्र अग्रवाल को मिल गए थे। उन्होंने उसके आश्रय व खानपान का प्रबंध कर दिया।
कागज पेन दिया तो लिख दिया अपने घर का पता
जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले मुरलीधर के पास गए तो उसे कागज पेन दे दिया। जिसे लेकर व्यक्ति ने उस पर एक पता लिख दिया। जब जितेंद्र ने अपने एक पहचान वाले के माध्यम से उस पते पर संपर्क किया तो पता लगा कि उस परिवार का सदस्य 12 साल पहले दिल्ली में उनसे बिछुड़ गया था।
फोटो सोशल मीडिया पर दिखाया तो वह पहचान गए। उन्होंने व्यक्ति की पहचान मुरलीधर अग्रवाल के रूप में दी। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ से मुरलीधर का दामाद भूपेंद्र कुमार और नाती शिवम सिंघल उन्हें लेने पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुरलीधर के परिवार में तीन बेटी व एक बेटा है। उन्होंने जितेंद्र अग्रवाल का इसके लिए आभार जताया।