-एचएसएससी और एचपीएससी की ओर से भर्तियों को लेकर मांगे जाएंगे आवेदन
-जल्दी भर्ती के लिए काफी संख्या में पदों को एचकेआरएन के माध्यम से भरा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। ग्रुप सी और डी की भर्तियों में आर्थिक-सामाजिक अंकों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में झटका खा चुकी हरियाणा सरकार ने अब खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी है। खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह 60 दिनों में 50 हजार पदों पर भर्तियां करने का संकल्प ले चुके हैं। पक्की भर्तियों के अलावा, अब हरियाणा सरकार कच्ची भर्तियों के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के तहत बंपर भर्तियां निकालने की तैयारी में है। क्योंकि पक्की भर्तियों की लंबी प्रक्रिया है और बार-बार कानूनी पेच फंसने से भर्तियां लटक रही हैं, इसलिए अब इनके अलावा, खाली ग्रुप सी और डी के पदों को एचकेआरएन के माध्यम से भरा जाएगा। संभावना है कि जुलाई में इन भर्तियों के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।
मुख्य सचिव की ओर से सभी विभागों, निगमों और बोर्डों से पहले से ही खाली पदों का ब्योरा मांगा जा चुका है। अब इन पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जाएगी। बताया जा रहा है कि जुलाई में जेबीटी के 2890 पदों पर भर्ती निकलेगी। इसके साथ ही 4102 टीजीटी और 2800 पीजीटी पदों पर भर्ती होगी। 1680 कंडक्टरों के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) भर्ती निकालेगा, जबकि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत 1100 कंडक्टर की भर्ती की जानी है।
भरे जाएंगे काॅलेजों में सहायक प्रोफेसरों के पद
हरियाणा सरकार ने सरकारी काॅलेजों में खाली सहायक प्रोफेसरों के पदों को भरने की तैयारी कर ली है। 2424 पद भरने के लिए मुख्य सचिव कार्यालय ने मंजूरी दे दी है। वित्त विभाग की मंजूरी के बाद अब उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के पास भर्ती का मांग पत्र भेजेगा। बताया जा रहा है कि जुलाई में एचपीएससी द्वारा कुल 3578 पदों पर भर्ती निकाली जाएगी। इसके अलावा 2656 पदों को हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से भरने की तैयारी है।
एचकेआरएन के तहत कार्यरत टीजीटी व पीजीटी की अनुबंध अवधि बढ़ी
शिक्षा विभाग ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत कार्यरत टीजीटी व पीजीटी शिक्षकों के सेवा अनुबंध में बढ़ोतरी की है। अब शिक्षक शैक्षणिक सत्र 2024-25 तक स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को इसके संबंध में निर्देश दिए गए हैं। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसको देखते हुए सरकार ने कार्यावधि को बढ़ाने का फैसला लिया गया है।