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कश्मीर के मसले पर खुलकर बोलीं ‘बुलबुल ए कश्मीर’, पाकिस्तान पर भी बात की

Fri, 07 Apr 2017 09:15 AM IST
डीके चौहान/अमर उजाला, पिंजौर
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‘बुलबुल ए कश्मीर’ सीमा अनिल सहगल
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‘बुलबुल ए कश्मीर’ के खिताब से नवाजी गईं मशहूर गजल गायिका सीमा अनिल सहगल पिंजौर आई तो उन्होंने कश्मीर के मसले पर खुलकर बात की। देश विदेश में मखमली आवाज का जादू बिखेरने वाली गायिका सहगल अपनी माता का इलाज कराने बुधवार को पिंजौर के एक निजी अस्पताल में पहुंचीं।
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सीमा अनिल सहगल के पिंजौर पहुंचने पर जब उनसे संगीत के अलावा कश्मीर के माहौल पर बात की तो उन्होंने कहा कि हर मसले का हल सभ्य बातचीत से हो सकता है। हालांकि संवेदनशील मुद्दे जैसे आतंकवाद और कश्मीर के पत्थरबाजों पर वह बोलने से बचतीं नजर आईं।

गौरतलब है कि सीमा अनिल सहगल ने पाकिस्तान के लाहौर, अमेरिका, यूरोप में लाइव परफार्मैंस दी है। इसके अलावा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित डोगरी कवि यश शर्मा की पुत्री सीमा अनिल सहगल देश की एकमात्र गायिका हैं।
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इंडो पाक दोस्ती को समर्पित एलबम ‘सरहद’ सीमा अनिल सहगल की है। यह एलबम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने अपने लाहौर दौरे के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को राष्ट्रीय सौगात के रूप में भेंट की थी।

भारत-पाक पर शायराना अंदाज

‘बुलबुल ए कश्मीर’ सीमा अनिल सहगल
उन्होंने बताया कि इंडो पाक मैत्री के लिए उन्होंने बहुत काम किए हैं। उन्होंने शायराना अंदाज में दोनों देशों के लिए कहा कि गुफ्तगू बंद न हो बात से बात चले, सुबहों तक शामें मुलाकात चले, हम पर हंसती हुई तारों भरी रात चले।

पाकिस्तान में जाने का डर नहीं बल्कि दिल का विद्रोह
दोनों देशों के बिगड़ते संबंधों के चलते कलाकारों के एक दूसरे देश में आने जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि जब भी वे पाकिस्तान गई हैं, वहां के कला प्रेमियों ने उनके गायन को सराहा और पसंद किया है।

हालांकि वह हमेशा पाकिस्तान जाती हैं, लेकिन पिछले साल उड़ी हमले के बाद माहौल खराब हुआ तो वह पाकिस्तान नहीं गईं। एक अंदर से गुस्सा था जिस कारण वहां जाने का दिल नहीं किया। पाकिस्तान में जाने का डर नहीं बल्कि दिल का विद्रोह और देश के प्रति प्यार था।
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आठ साल की उम्र से गायन शुरू किया

‘बुलबुल ए कश्मीर’ सीमा अनिल सहगल
सीमा अनिल सहगल ने आठ साल की उम्र से ही गायन शुरू कर दिया था। और 17 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली ग्रामोफोन डिस्क निकाली। इसके अलावा मई 1999 में हावर्ड यूनिवर्सिटी में बोस्टन यूएसए ने उन्हें यूनिवर्सिटी कैंपस में गाने के लिए आमंत्रित किया।

मेवाड़ फाउंडेशन उदयपुर की ओर से सीमा अनिल सहगल को हाकिम खान सुर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी पुरस्कार से सम्मानित होने वालों में स्वर कोकिला लता मंगेशकर, धर्म गुरु दलाई लामा, हिंदी कवि हरिवंश राय बच्चन, सुनील दत्त शामिल हैं।

सीमा अनिल सहगल गीत, भजन और फोक गाने को एक ही अंदाज में आसानी से गा लेती हैं। इसके अलावा जो वह गाती हैं, उसे वह स्वयं कंपोज करती हैं।
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