विधानसभा में राज्यपाल अभिभाषण पर चर्चा के बाद जब मुख्यमंत्री अपना जवाब सदन में दे रहे थे, तो उस वक्त भी माहौल हंगामेदार रहा। विपक्ष के विधायक कई बार सीएम का टोकते रहे, जिस वजह से उन्हें बीच में रुकना पड़ा। कई मुद्दों पर विधायकों ने सीएम से बहस भी की। इस पर स्पीकर ने उन विधायकों को फटकारा भी।
सीएम मनोहर लाल ने सदन में अपना जवाब देने से पहले विपक्ष को भी आइना दिखाने का पूरा प्रयास किया। सीएम ने इस दौरान एक कहानी सुनाते हुए विपक्ष पर करारी चोट की। सीएम ने कहा कि पूर्व की सरकारों का माहौल बदलने के लिए हमें जनता के बीच कई वर्ष और रहना होगा। मगर विपक्ष सत्ता पाने की ऐसी तड़प लिए बैठा है कि वे विभिन्न मुद्दों पर जनता को गुमराह कर सिर्फ वाहवाही बटोरना चाहता है।
सीएम ने कहा कि मैं हैरान हूं ऐसे मुद्दे जिन्हें सुप्रीम कोर्ट तक खारिज कर चुका है, उन मुद्दों को भी विधायक अपनी सस्ती राजनीति चमकाने के लिए सदन में उठा रहे हैं। ये बात यदि सदन से बाहर कही जाती तो कोई भी ऐसे विधायक को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना केस में लपेटकर कोर्ट में खड़ा करवा देता। सीएम ने कहा कि अब जनता सयानी है और सब जान चुकी है। इसलिए ऐसे नेताओं के फेर में अब आने वाली नहीं है।
अफसर-कर्मियों के भ्रष्टाचार पर सीएम का ‘सख्त’ तंज
सीएम ने कहा कि उन्हें मालूम है अभी भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जिस अफसर और कर्मचारी का जहां दांव लगता है, वो भ्रष्टाचार से चूकता नहीं है। मगर बताना चाहूंगा कि ऐसे अफसर-कर्मचारी हमारी सरकार के कार्यकाल में भर्ती नहीं हुए हैं।
हमने तो भर्ती का ऐसा सिस्टम बदला है कि घर बैठे युवाओं को आश्चर्यजनक तरीके से बिना खर्ची-पर्ची के नियुक्ति पत्र पहुंच गए और आज ऐसे सभी कर्मचारी-अफसर ईमानदारी से काम करेंगे, ऐसी मेरी कामना है। सीएम ने कहा कि पहले सिस्टम यह था कि कोई अपनी मां के हाथ कंगन तो कोई पिता जी की जमीन बेचकर नौकरी पाता था। मगर ये सरकार भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगी।
‘सामान कहां पहुंचाना है’ के तंज पर भिड़े मनोहर-हुड्डा
अपने वक्तव्य में सीएम ने खनन माफिया पर ऐसी बात कह डाली, जिससे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा तिलमिला उठे। दरअसल, सीएम खनन माफिया पर बात कर रहे थे। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि उन्हें एक बार फोन आया कि उनका ‘सामान’ पड़ा है, उसे कहां पहुंचाया जाए। सीएम ने कहा कि पहले तो वे समझ नहीं पाए, मगर बाद में उन्हें बताया गया कि इस तरह का ‘खास सामान’ खनन माफिया अकसर पहले के मुख्यमंत्रियों को देते रहे हैं। बस, सीएम का इतना कहना था कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा खड़े हो गए।
हुड्डा ने कहा कि सीएम ने ये बात सदन में एक जिम्मेदार पद पर होने के बावजूद कही है, इसलिए वे स्पष्ट करें कि ऐसा कौन सा मुख्यमंत्री था, जिन्हें खनन माफिया सामान पहुंचाता था। इस पर सीएम ने कहा कि मैंने किसी का नाम नहीं लिया है, मैंने तो वो बताया है, जो उनके साथ घटा, ऐसी बातों का कोई सुबूत नहीं होता, यह हर कोई जानता है। लेकिन हां, हमारी सकार से पहले खनन के ठेकों से सरकार की रिकवरी कम क्यों थी, ये हम जरूर जांच करवाएंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के फलस्वरूप राज्य में खनन गतिविधियों से राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2004 से 2014-15 तक राज्य ने औसतन 140 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का राजस्व प्राप्त किया। इसके विपरीत वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान राज्य ने हर वर्ष औसतन 520 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है।
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति घोटाला भी पूर्व सरकार के कार्यकाल का
सीएम ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2008 से 2014 के बीच 46 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। उन्होंने कहा कि इस मामले में चार एफआईआर दर्ज की गई हैं और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने सम्मानित सदन को आश्वासन दिलाया कि जांच के दौरान दोषी पाए जाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले के तार राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से जुड़े हुए हैं।
जिन राइस मिलों का रिकार्ड ठीक नहीं, वहां धान ज्वाइंट कस्टडी में रहेगी
सीएम ने कहा कि राज्य सरकार यह भी विचार कर रही है कि जिन चावल मिलों का रिकार्ड संतोषजनक नहीं है, उनके धान को लीकेज को रोकने के लिए संयुक्त कस्टडी में रखा जाएगा। वहां सरकार समेत विभिन्न एजेंसियों का ताला लेगा। उनके अनुसार राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य की मंडियों में पहले हरियाणा के किसानों के धान की खरीद हो और बाद में पड़ोसी राज्य के किसानों के धान की।
वर्ष 2014 तक धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक होने पर किसान के धान की खरीद नहीं की जाती थी लेकिन राज्य में वर्तमान सरकार के गठन के बाद हमने 2015 में एक नई प्रणाली क्रियान्वित की, जिसके अनुसार नमी की मात्रा 17 प्रतिशत तक होने पर राशि में कटौती नहीं की जाएगी लेकिन यदि नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक (अधिकतम 22 प्रतिशत तक) होगी तो नमी की बढ़ी मात्रा के अनुपात में राशि की कटौती की जाएगी।
वृक्षाच्छादित क्षेत्र बढ़ रहा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कैथल के गांव मुंदड़ी में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 20 एकड़ भूमि खरीदी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में वन क्षेत्र कम नहीं हुआ है और 3.50 प्रतिशत ही है। बहरहाल, राज्य में वृक्षाच्छादित क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ रहा है और अब 7.13 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 'म्हारा गांव जगमग गांव योजना' के तहत राज्य के करीब 4463 गांवों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति मिल रही है। इसके अतिरिक्त, पहली बार बिजली निगम लाभ में चल रहे हैं।
सदन में लाएंगे भूजल प्राधिकरण बिल
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में भू-जल प्राधिकरण बिल लेकर आएंगे ताकि डार्क जोन क्षेत्रों में नलकूपों के कनेक्शन दिए जा सकें। पहले इसके लिए केंद्रीय भू-जल बोर्ड से अनुमति लेनी होती थी। अब राज्य भू-जल बोर्ड अपनी सिफारिशें केंद्रीय भू-जल बोर्ड के समक्ष रखेगा। उन्होंने बताया कि सदन में चर्चा के दौरान पानीपत जिले के बापौली खंड को भी डार्क जोन क्षेत्र श्रेणी में रखा गया है जबकि आमतौर पर वहां भू-जल का स्तर काफी ऊपर रहता है। इसी प्रकार, टोहाना व यमुनानगर में भी ऐसे मामलों की जानकारी मिली है जबकि सामान्यत: वहां पर भू-जल का स्तर काफी ऊपर रहता है।
किमी स्कीम घोटाला: 510 बसें सड़कों पर आएगी, गड़बड़ी का केस भी चलता रहेगा
सीएम ने किलोमीटर स्कीम घोटाले में साफ किया कि 31 मार्च से पहले 510 बसें सड़कों पर आएगी। उनके अनुसार हम उन सभी ठेकेदारों से उनकी बसें हायर कर रहे हैं, जो हमारे रिवाइज्ड रेट 26.92 रुपये प्रति किलोमीटर पर बसें देने को तैयार है। उनके अनुसार ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ये बसें तैयार है और पर्यावरण मानक बीएस-4 कैटेगरी के हैं।
इस मानक को देश में 31 मार्च 2020 को खत्म कर बीएस-6 मानक लागू कर दिया जाएगा। ऐसे में 31 मार्च से पहले इन बसों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो ये बसें बेकार हो जाएंगी और अप्रत्यक्ष रूप से यह करोड़ों की पब्लिक मनी का ही नुकसान होगा। सीएम ने कहा कि इस घोटाले में विजिलेंस जांच कर रही है, जो कसूरवार होगा, उसे सजा जरूर मिलेगी।
उस मामले में सरकार किसी प्रकार की रहम नहीं कर रही। मगर ठेकेदारों की इन तैयार बसों का नुकसान न हो, इसलिए उन्हें रिवाइज्ड रेट पर बसें सरकार को देने का ऑफर दिया गया है। जिस ठेकेदार को ये रेट पसंद है, तो वे बसें दे सकता है।
शहरी निकायों में 100 करोड़ तक के सांझा टेंडर पर रोक
हरियाणा के सभी शहरी स्थानीय निकायों में अब सौ करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों के सांझा टेंडर नहीं होंगे। प्रदेश सरकार ने एक से अधिक ठेकेदारों के मिलकर टेंडर लेने पर रोक लगा दी है। इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। जिसे देखते हुए स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज ने सभी निकायों को यह निर्णय लागू करने के निर्देश दे दिए हैं। निकाय मंत्री अनिल विज ने सदन में इसकी घोषणा की।
विज सोनीपत से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पंवार के सवाल का जवाब दे रहे थे। पंवार ने सदन में पूर्व निकाय मंत्री पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। विज ने कहा कि विकास कार्यों में और अधिक पारदर्शिता लाने के मद्देनजर व ठेकेदारों का एकाधिकार खत्म करने के उद्देश्य से भविष्य में 100 करोड़ रुपये तक के कार्य अब ठेकेदारों के समूह को संयुक्त रूप से न देकर अलग-अलग आवंटित किए जाएंगे। कांग्रेस विधायक पंवार ने कहा कि सोनीपत शहर के बस स्टैंड के पास गुजर रहे नाला नंबर 6 को ढकने का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। 25 जुलाई 2017 को इसका टेंडर हुआ था। 3 नवंबर 2018 तक काम खत्म होना था।
निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण ड्रेन पूरी तरह बंद है। लोगों के घरों में एक-एक फुट पानी घुसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके टेंडर की कुल राशि का पांच प्रतिशत हिस्सा पूर्व निकाय मंत्री ने लिया है। पूर्व मंत्री व उनके पति कमांडो लेकर घूमते हैं, वे उन्हें किसने दिए हैं। विकास कार्यों का नारियल भी वहीं फोड़ रहे हैं, क्या शहरी निकाय मंत्री ने अपना मंत्रालय उन्हें सबलेट किया है। इस पर विज ने विधायक को जवाब देते हुए कहा कि कुछ लोग जीतकर भी आहत रहते हैं। जब आपने उन्हें हरा दिया तो खुश रहो। वे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कराते रहे हैं और आगे भी कराएंगे। ड्रेन निर्माण से किसी के घर को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
18 महीने में पूरा करा लेंगे काम
अनिल विज ने कहा कि ड्रेन का कार्य 25 करोड़ रुपये से पूरा होना था। ठेकेदार निर्धारित समय अवधि में कार्य को पूरा नहीं कर पाया, जिसके फलस्वरूप कार्य का अनुबंध रद्द कर दिया गया। कार्य को नई सिरे से निविदा आमंत्रित कर पिछली एजेंसी की जोखिम लागत के आधार पर 18 महीने में पूरा कराएंगे।
दोषी बख्शे नहीं जाएंगे, चाहे पक्ष के हों या विपक्ष के
अनिल विज ने कहा है कि वह भ्रष्टाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर किसी भी तरह की भ्रष्टाचार की जानकारी सदन के सदस्यों के पास है तो वे उनके संज्ञान में ला सकते हैं। वे उनकी उम्मीदों पर पूरी तरह उतरेंगे और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के।
शून्यकाल न रखने पर कांग्रेस का हंगामा, वाकआउट
हरियाणा विधानसभा में प्रश्नकाल के बाद जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल न रखने पर कांग्रेस विधायक भड़क गए। उन्होंने अपनी सीटों पर खड़े होकर शोरशराबा शुरू कर दिया। प्रश्नकाल के बाद 23 मिनट तक कोई कार्यवाही नहीं हुई, पूरा समय हंगामा होता रहा। शून्यकाल न होने पर कांग्रेसी विधायक वाकआउट कर गए। हालांकि, वे एक मिनट बाद ही सदन में लौट आए। गन्ने का मूल्य बढ़ाने के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर पहले बोलने का मौका न देने पर इनेलो विधायक अभय चौटाला ने भी वाकआउट किया। कुछ ही देर में वह भी सदन में लौट आए।
प्रश्नकाल के खत्म होते ही कांग्रेस विधायक सदन में अपने मुद्दे उठाने केलिए खड़े हो गए। इस पर स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने जानकारी दी कि शून्यकाल नहीं होगा। समय के अभाव में शून्यकाल नहीं रखा गया है। गन्ने का मूल्य बढ़ाने के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा कराई जाएगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा व किरण चौधरी सहित कांग्रेस विधायक ने अपना विरोध जताना शुरू कर दिया। सरकार की तरफ से गृह मंत्री अनिल विज व संसदीय कार्य मंत्री कंवर पाल मामले को शांत करने की कोशिश करते रहे, लेकिन बात नहीं बनी।
विज ने कहा कि कौन सी नियमावली में है कि शून्यकाल होगा ही। इसका कोई प्रावधान नहीं है। स्पीकर ने कहा कि शून्यकाल भाजपा सरकार ने शुरू किया। कांग्रेस सरकार में तो होता ही नहीं था। लगता है कांग्रेस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर तैयारी करके नहीं आई है। इस पर हंगामा और बढ़ गया। इस पर स्पीकर ने सीट से उठकर सबको बिठाया। भाजपा विधायक शांति से पूरा नजारा देखते रहे। स्पीकर ने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के बाद समय बचेगा तो शून्यकाल करा देंगे। इस पर कांग्रेस विधायक नहीं माने। इतने में सीएम मनोहर लाल भी सदन में पहुंच गए।
उन्होंने विज से पूरा मामला जाना। इससे पहले कि वह अपनी सीट पर खड़े होकर कुछ बोलते। नेता प्रतिपक्ष हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक वाकआउट कर गए। कांग्रेस विधायक चिरंजीव राव ने बाहर जाते समय भारत माता की जय के नारे लगाए। जिसका भाजपा विधायकों ने भी नारे लगाकर जवाब दिया।
नए इंजीनियरिंग, बहुतकनीकी संस्थान नहीं खुलेंगे, खाली रह रही सीटें
हरियाणा में नए बुहतकनीकी संस्थान नहीं खोले जाएंगे। पहले से संचालित संस्थानों में बड़े पैमाने पर सीटें खाली रह रही हैं। विद्यार्थियों का विज्ञान के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए सरकार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की कमेटी गठित करेगी। तकनीकी शिक्षा मंत्री अनिल विज ने विधानसभा में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह निर्णय विद्यार्थियों का विज्ञान के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए लिया है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।
वर्तमान में संचालित बहुतकनीकी व इंजीनियरिंग कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में हर शैक्षणिक सत्र में निरंतर सीटें खाली रह रही हैं। यह चिंता का विषय है। ऐसा लगता है कि बारहवीं स्तर के विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुझान कम हो रहा है। अब आगे से नए तकनीकी या इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के बारे में विभाग विचार नहीं करेगा, क्योंकि पहले से संचालित प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में आवंटित सीटें खाली रहती हैं।
महिला बहुतकनीकी संस्थानों व इंजीनियरिंग कॉलेजों में 37 प्रतिशत व पुुरुष संस्थानों में 62 प्रतिशत सीटें नहीं भर पा रही हैं। विज ने सदन में आश्वासन दिया कि इंजीनियरिंग कॉलेज और बहुतकनीकी संस्थानों के लिए सरकार विशेष बसों की व्यवस्था करने को तैयार है ताकि दूर से आने वाले विद्यार्थियों को कोई दिक्कत न हो। प्रश्नकाल में कोसली विधानसभा क्षेत्र के भाकली गांव में बहुतकनीकी संस्थान खोलने को लेकर भाजपा विधायक लक्ष्मण यादव ने सरकार से सवाल पूछा था। इस पर विज ने कहा कि सरकार के पास नया बहुतकनीकी संस्थान खोलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
अवैध कालोनियों में सीवरेज लाइन डालने की होगी जांच
हरियाणा की अवैध कालोनियों में अमरुत योजना के तहत सीवरेज लाइनें डालने वाले शहरी निकाय विभाग के अधिकारियों की अब खैर नहीं है। निकाय मंत्री अनिल विज अवैध कालोनियों में सीवरेज लाइनें डालने की जांच कराएंगे। इसके लिए बकायदा जांच समिति गठित की जाएगी। जांच में आरोप साबित होने पर दोषियों के खिलाफ आवश्यकतानुसार कार्रवाई होगी। अनिल विज ने यह घोषणा रोहतक से कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा के सवाल के जवाब में की। बत्रा ने सवाल उठाया था कि रोहतक की अवैध कालोनियों में कैसे अमरुत योजना के तहत सीवरेज लाइनें डाल दी गईं।
एक तो निजी एजेंसी को काम सौंपा गया, दूसरा डीपीआर के अनुसार आवंटित कार्य से अधिक काम मौके पर किया गया। इसकी जांच कमेटी बनाकर कराई जाए। विज ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत आने पर अवश्य जांच होगी। रोहतक में डीपीआर से बाहर जाकर कैसे काम किया गया, इसकी तह तक जाएंगे। अमरुत योजना में प्रदेश की 18 पालिकाओं को शामिल किया गया है। दो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) जल आपूर्ति योजना के लिए 97.90 करोड़ रुपये और सीवरेज योजना के लिए 195.43 करोड़ रुपये की राशि को सक्षम प्राधिकारी ने रोहतक शहर के लिए मंजूर की है।
रोहतक के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक जलापूर्ति पाइप लाइन 104.461 मीटर और सीवरेज सिस्टम पाइप लाइन 93.775 मीटर बिछाई जा चुकी है। रोहतक शहर के लिए अमरुत परियोजना के तहत केंद्र सरकार से अब तक 56.601 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है और 37.734 करोड़ रुपये की राशि अभी बकाया है।
कालोनियों में टलेगा 33 व11 केवी लाइनों का खतरा
हरियाणा सरकार ने कालोनियों या घरों के ऊपर से गुजरने वाली खतरनाक 33 व 11 केवी की लाइनों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। इसमें लोगों से कोई राशि नहीं ली जाएगी। बिजली मंत्री रणजीत चौटाला ने प्रश्नकाल में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 46.84 करोड़ रुपये की लागत से अब तक 11 केवी की 779 खतरनाक लाइनों व 33 केवी की 25 लाइनों की शिफ्टिंग का कार्य पूरा हो चुका है। 11 केवी की 600 खतरनाक लाइनों व 33 केवी की 12 लाइनों की शिफ्टिंग का कार्य प्रगति पर है।