प्रशासन की झोली भरेगी या खाली रहेगा इसका फैसला सोमवार को बजट आने के साथ ही हो जाएगा। बजट मिलने के बाद चंडीगढ़ के प्रोजेक्ट्स की दशा-दिशा तय होगी।
प्रशासन ने इस बार केंद्र सरकार से प्लान बजट हेड में 2 हजार 95 करोड़ रुपये की मांग की है। यह राशि 2015-16 में मांगी गई राशि की लगभग दोगुणा है। जबकि नॉन प्लान बजट हेड में 3 हजार 394 करोड़ रुपये मांगे हैं, जो पिछले साल से 350 करोड़ रुपये अधिक है।
वित्त वर्ष 2015-16 के लिए प्लान बजट के तहत 860 करोड़ रुपये मिले थे, बाद में केंद सरकार ने विभागों का बजट खर्चने में खराब प्रदर्शन देखने केबाद 225 करोड़ रुपये काट लिए थे। कटने केबाद यह रकम 634 करोड़ रह गई। बात वित्त वर्ष 2016-17 की करें तो इसके लिए प्रशासन ने वित्त मंत्रालय को 2 हजार 95 करोड़ रुपये का बजट एस्टीमेट मंजूरी करने केलिए भेजा है।
वहीं नॉन प्लान बजट 2016-17 के लिए 3 हजार 394 करोड़ रुपये की मांग की गई है। जबकि 2015-16 में 2 हजार 971 करोड़ रुपये मांगे गए थे। प्रशासन ने प्लान बजट के तहत करीब 1235 करोड़ रुपये अधिक मांगे हैं। सूत्रों के मुताबिक 500 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए मांगे गए हैं।
हालांकि वित्त मंत्रालय की कैंची एस्टीमेट बजट पर जरूर चलती है। इस बार भी एस्टीमेट में मांगी गई पूरी रकम मिलने के कम ही आसार लग रहे हैं। प्रशासन के अधिकारी इस उम्मीद में हैं कि एस्टीमेट बजट का आधा भी मिल जाए तो गनिमत होगी।