हरियाणा में भूजल के हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। प्रदेश में 140 ब्लाक ऐसे हैं, जहां भूजल दोहन तेजी से हो रहा है, इनमें 36 ब्लाक तो डार्क जोन में जा चुके हैं। इन इलाकों में भूजल 1500 फीट तक नीचे जा चुका है। लिहाजा हरियाणा सरकार सूबे में माइक्रो इरीगेशन यानी सूक्ष्म सिंचाई के तरीकों पर ज्यादा जोर दे रही है। माइक्रो इरीगेशन प्रोग्राम के अंतर्गत किसानों को सिंचाई के ड्रिप (टपका विधि) और स्प्रिंकल (फव्वारा विधि) तरीकों के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।
लेकिन कृषि और बागवानी विभाग की वित्तीय प्रोग्रेस रिपोर्ट यदि देंखे तो ये रिपोर्ट माइक्रो इरीगेशन प्रोग्राम को झटका देती है। रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रो इरीगेशन प्रोग्राम के लिए जितना भी बजट विभाग के पास उपलब्ध था, वो पिछले बारह साल से कभी पूरा खर्च ही नहीं हुआ। इसके अलावा माइक्रो इरीगेशन प्रोग्राम में एरिया कवर करने की रफ्तार भी अपेक्षाकृत कम ही रही।
बजट खर्च करने में बरती लापरवाही
वर्ष उपलब्ध बजट खर्च हुए (लाख रुपये में)
वर्ष 2006-07 583.69 235.74
वर्ष 2007-08 1124.36 645.20
वर्ष 2008-09 2113.62 1891.39
वर्ष 2009-10 942.42 851.76
वर्ष 2010-11 2624.10 2594.31
वर्ष 2011-12 4065.40 4034.09
वर्ष 2012-13 6648.22 6260.83
वर्ष 2013-14 6784.58 6189.32
वर्ष 2014-15 3051.72 3029.07
वर्ष 2015-16 4416.75 2000.45
वर्ष 2016-17 8221.23 2083.31
वर्ष 2017-18 6025.25 2318.85
अभी तक कवर हुआ सिर्फ 2.8 प्रतिशत एरिया
माइक्रो इरीगेशन प्रोग्राम के तहत विभाग की चाल बजट खर्च करने में ही सुस्त नहीं है, बल्कि अभी तक इस स्कीम की फिजिकल प्रोग्रेस भी बहुत धीमी है। हरियाणा में कुल सिंचाई एरिया 29.74 लाख हेक्टेयर है। इसमें से 11.53 लाख हेक्टेयर एरिया में नहरों व रजबाहों से और 18.21 लाख हेक्टेयर में भूजल से सिंचाई होती है। लेकिन पिछले 12 सालों से विभाग माइक्रो इरीगेशन प्रोग्राम में सिर्फ 81228 हेक्टेयर एरिया ही कवर कर पाया है। जोकि कुल क्षेत्र का लगभग 2.8 प्रतिशत है।
माइक्रो इरीगेशन को लेकर सरकार बहुत गंभीर है। अटल भूजल योजना के तहत भी 700 करोड़ से अधिक बजट प्राप्त हुआ है। प्रदेश में सिंचाई के तरीके बदलने पर जोर दिया जा रहा है। ताकि भूजल को बचाया जा सके। इस प्रोग्राम में तेजी लाई जाएगी।
-ओमप्रकाश धनखड़, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री