हरियाणा सरकार के बजट में उद्यमी और कर्मचारी खाली हाथ ही रहे हैं। निराशा के साथ ही उन्हें भविष्य में बेहतरी की उम्मीद रखनी होगी। सरकार ने उद्यमियों के लिए बजट में सीधी कोई घोषणा नहीं की जिससे उन्हें राहत मिल सके। उद्योग जगत राहत पैकेज की आस लगाए हुए था लेकिन कुछ भी नहीं मिला।
सरकार ने बजट में कोरोना के दौरान उद्योगों को राहत देने के लिए उठाए कदमों, नए निवेश व नए उद्योगों की स्थापना की ही जानकारी दी है। जिससे उद्यमी नाराज हैं। कर्मचारियों को भी बजट में कुछ नहीं मिला। कर्मचारी डीए बहाली, पुरानी पेंशन बहाली, पंजाब समान वेतनमान, कच्चे कर्मचारियों के पक्का होने की आस लगाए बैठे थे लेकिन मुख्यमंत्री के बजट भाषण में इनका बिल्कुल जिक्र नहीं आया।
जुमलेबाजी पर आधारित बजट : बुवानीवाला
उद्यमी अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सरकार का बजट केवल जुमलेबाजी पर आधारित है, धरातल पर इसका कोई लेना-देना नहीं। भिवानी में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज पिछले कई वर्षों से निर्माण की बाट जोह रहा है। छोटे एवं मध्यम व्यापारियों, दुकानकारों, उद्योगपतियों की कमर टूट चुकी है। बजट में कोरोना काल में बंद हुए उद्योगों को शुरू करने या अन्य ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो व्यापारियों का भला कर सकें। निजी क्षेत्र में नौकरियां किस आधार पर दी जाएंगी, यह बताने में सरकार नाकाम रही है।
उद्योगपति को निराशा हाथ लगी : गर्ग
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि व्यापारी, उद्योगपति को निराशा हाथ लगी है। व्यापार व उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए किसी प्रकार की छूट नहीं दी गई। सरकार प्राइवेट सेक्टरों के माध्यम से 75 प्रतिशत युवाओं को रोजगार देने की बात कर रही है, जब प्रदेश में बंद पड़े उद्योग चालू नहीं होंगे व नए उद्योग स्थापित नहीं होंगे तो बेरोजगारों को रोजगार कहा से मिलेगा। यह बजट प्रदेश में महंगाई को बढ़ावा देने वाला बजट है। इससे जनता पर पहले से ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ेगा।
कर्मचारियों की पूरी तरह अनदेखी : लांबा
सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने कहा कि बजट छलावा है। सरकार ने कर्मचारियों की पूरी तरह अनदेखी की है। कोरोना काल में कर्मचारियों ने बढ़ चढ़कर काम किया लेकिन सरकार ने उनके बार में बिल्कुल नहीं सोचा। इससे कर्मचारी वर्ग में रोष बढ़ेगा।