वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शनिवार को संसद में पेश किए गए बजट में 150 ट्रेनों को पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप (पीपीपी) के तहत चलाने का एलान किया गया। मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों के निजीकरण की शुरुआती योजना पर विचार हो रहा है।
यात्रियों से किराया निजी कंपनी ही वसूलेगी, लेकिन निजी कंपनी रेल चलाने के एवज में रेल मंत्रालय को पैसा देगी। 100 दिन के भीतर रेलवे निजी कंपनियों की बोलियां मंगवा सकता है। बता दें कि कुछ ट्रेनों को प्राइवेट हाथों में देना एक अच्छा फैसला हो सकता है, क्योंकि जिस तरह का फर्क हम सरकारी बैंकों और प्राइवेट बैंकों की सेवाओं में देखते हैं, हो सकता है आने वाले वक्त में यही फर्क रेलवे में भी देखने को मिले।