करतारपुर कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए दर्शन स्थल और बीएसएफ की कैंटीन को हटाया जाएगा। डेरा बाबा नानक में भारत-पाक सीमा की जीरो लाइन पर दोनों देशों के अफसरों की मीटिंग के बाद सड़क निर्माण का काम शुरू हो गया।
लुधियाना की कंस्ट्रक्शन कंपनी सीगल प्राइवेट लिमिटेड को कॉरिडोर बनाने का जिम्मेदारी सौंपी गई है। रोड बनाने का काम सिगल कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर नरिंदर कुमार की देख-रेख में शुरू किया गया। इस मौके पर अजीतपाल सिंह तालमेल अफसर और नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारी रिटायर्ड तहसीलदार प्रेमचंद भी उपस्थित थे।
दर्शन स्थल और बीएसएफ की कैंटीन को ढहा दिया जाएगा
प्रोजेक्ट मैनेजर नरिंदर कुमार ने बताया कि एनएचआई की तरफ से कंस्ट्रक्शन का काम करने के लिए उनकी कंपनी को ठेका दिया गया है। गांव मान से लेकर भारत-पाक सीमा तक यह रोड बनाया जाएगा। यह रोड करीब 3.60 किलोमीटर का होगा, जिसमें एक मेजर ब्रिज भी बनाया जाएगा।
भारत-पाक सीमा पर बने दर्शन स्थल से जीरो लाइन तक यह ब्रिज बनेगा, बाकी सारी रोड बनाई जाएगी। दर्शन स्थल और बीएसएफ की कैंटीन को ढहा दिया जाएगा, क्योंकि यह दोनों स्थान करतारपुर कॉरिडोर की रोड के बीच आते हैं। उन्होंने बताया कि कि नवंबर महीने से पहले इस रोड को पूरा कर लिया जाएगा।
किसानों ने एसडीएस से मुआवजे को लेकर मुलाकात की
गौरतलब है कि एसडीएम गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में लक्खा सिंह की जमीन पर उसकी सहमति से आईसीपी (इंटीग्रेटड चेक पोस्ट) बनाने की शुरूआत की गई थी। दूसरी तरफ, किसानों ने अपनी जमीनों के मुआवजे के संबंध में एसडीएम डेरा बाबा नानक गुरसिमरन सिंह ढिल्लों के साथ एक मीटिंग की।
मीटिंग के दौरान एसडीएम गुरसिमरन सिंह ने किसानों से क्लेम मांगे। एसडीएम गुरसिमरन सिंह ढिल्लों ने किसानों से कहा कि कॉरिडोर के रास्ते में जिन-जिन किसानों के ट्यूबवेल आते हैं, वह उसे कहीं भी ले जा सकते हैं। नुकसान के बदले में मुआवजा भी दिया जाएगा। किसानों को इस संबंध भी क्लेम जमा करवाने को कहा गया है।