फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Chandigarh News: डीजीआरई में आत्महत्या करने वाले कर्मी के भाई ने पुलिस कार्रवाई पर खड़े किए सवाल

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। बीते 21 मार्च को सेक्टर 37 स्थित रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (डीजीआरई) के दफ्तर की इमारत से कूद कर आत्महत्या करने वाले 41 वर्षीय जसविंदर सिंह के परिवार ने मामले में चंडीगढ़ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आत्महत्या के इस मामले में मृतक के भाई (शिकायतकर्ता) पटियाला निवासी भूपिंदर सिंह का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए वह पुलिस के आला अधिकारियों तक से गुहार लगा चुके हैं मगर पिछले छह माह से आरोपियों की गिरफ्तारी तक नहीं हुई है। जबकि उनका भाई मरने से पहले सुसाइड नोट छोड़ कर गया था जिसमें आरोपी अधिकारियों के नाम थे। भूपिंदर सिंह का कहना है कि वह इंसाफ के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करने पर विचार कर रहे हैं। वहीं मामले में जांचकर्ता पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। सेक्टर 39 थाना पुलिस ने मामले में बीते 22 मार्च को आत्महत्या के लिए उकसाने और सांझी सोच के तहत किए गए किसी अपराध की धारा के तहत यह मामला दर्ज किया था।
विज्ञापन


मृतक डीआरडीओ के अधीन एसएएसई/डीजीआरई में टेक्निशियन के पद पर कार्यरत था। रोजाना की तरह 21 मार्च की सुबह वह दफ्तर पहुंंचा था। जिसके बाद वह इमारत की पहली मंजिल पर गिरा पड़ा मिला। यहां से उसे पीजीआई से लाया गया जहां उसकी मौत हो गई थी। भूपिंदर सिंह का कहना था कि उनके भाई की पेंट की जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला था। इसे पुलिस को सौंप दिया गया था। शिकायतकर्ता के मुताबिक सुसाइड नोट में उनके भाई ने अपनी मौत का जिम्मेदार सुधीर, अनुराग, किरपाल सिंह, अक्षय जैन व अन्यों को बताया था। यह सभी अधिकारी-कर्मचारी मृतक के साथ कार्यालय में काम करते थे। मृतक के भाई ने पुलिस से मांग की थी कि उनके भाई की मौत के मामले में सुसाइड नोट में जिन लोगों का नाम है उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता बोला- आरोपियों के कॉलम में ‘अज्ञात’ क्यों
मृतक के भाई ने मामले में चंडीगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से भी गुहार लगाते हुए अपना मांगपत्र सौंपा था। उन्होंने कहा था कि डीजीआरई/डीआरडीओ में कार्यरत अधिकारी सुधीर धमीजा, अनुराग शर्मा, किरपाल सिंह और अक्षय जैन उनके भाई को तंग-परेशान करते थे। इसके चलते उनके भाई ने डीआरडीओ की छत से कूद कर आत्महत्या कर ली थी। परिवार की काफी कोशिशों के बाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। वहीं एफआईआर के सात नंबर कॉलम में आरोपियों के खाने में ‘अज्ञात’ दर्ज किया गया था। परिवार का कहना है कि इतना लंबा समय बीतने के बाद भी मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
विज्ञापन


कई जांच अधिकारी बदल चुके
शिकायकर्ता के मुताबिक मामले के जांचकर्ता अधिकारी के कहने पर उन्हें अपने भाई का लेपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, सेक्टर 38सी एसबीआई खाते की फोटोस्टेट कॉपी जमा करवा दी थी। इस मामले में तीन जांचकर्ता अधिकारी बदल चुके हैं। मृतक के भाई के मुताबिक पुलिस ने उनके भाई की लिखावट सुसाइड नोट से मिलाने के लिए नमूने सीएफएसएल में भिजवाए थे। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह बैंक खाते की पासबुक की कॉपी वह खुद 25 मार्च को एएसआई महाबीर सिंह और पीएनबी, पटियाला में खाते की पासबुक की फोटोस्टेट 13 जून को एसआई नवीन फोगाट (बर्खास्त) को सौंप चुके हैं। इसके अलावा डीएसपी चरणजीत सिंह के दफ्तर में बयान भी दर्ज करवा चुके हैं।

चरित्र हनन कर ब्लैकमेल किया जाता था
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके भाई ने आत्महत्या से पहले अपने लेपटॉप में उन्हें परेशान करने वाले लोगों के नाम टाइप किए थे। उसमें एक डाटा एंट्री ऑपरेटर समेत दो लड़कियों के नाम भी लिखे थे। जिन्हें किरपाल सिंह और अक्षय जैन ने उनके भाई के साथ खड़ा कर उसे व्यभिचारी साबित कर ब्लैकमेल किया करते थे। मृतक के भाई का कहना था कि उन लड़कियों से पुलिस को पूछताछ करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें