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Chandigarh News: हादसे में टूटी हड्डी, कई जगह करवाए ऑपरेशन, सात साल बाद मोहाली एम्स ने पैरों पर किया खड़ा

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मोहाली। विश्व मरीज सुरक्षा दिवस दुनिया भर में आज मनाया जा रहा है। इसे मनाने का मकसद मरीजों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना है। वहीं कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जो मरीजों के साथ ऐसा रिश्ता बनाते हैं जिससे की मरीज उन्हें कभी नहीं भूल पाते और वह उनके घर के सदस्य की तरह ही बन जाते हैं। ऐसा इसलिए हो पाता है क्योंकि वह उन्हें इलाज से स्वस्थ बना देते हैं और पैरों पर खड़ा कर देते हैं।
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करनाल की महिला ऋतु सीवरेज का ढक्कन नहीं होने के कारण उसमें गिर गई थी। इस कारण टांग की हड्डी टूट गई। इसके बाद बहुत ऑपरेशन कराए फिर भी वह चल नहीं पा रही थी। घटना को याद करते उन्होंने बताया कि 2015 में शादी में गई थी। जहां पर बहुत बारिश हो रही थी जिस कारण सीवरेज ओवरफ्लो कर रहे थे। तब वह एक सीवरेज का ढक्कन नहीं होने कारण गिर गई थी। इसके बाद उन्होंने पहला ऑपरेशन करनाल के सिविल अस्पताल में कराया तो उन्हें लगा सब कुछ ठीक है लेकिन कुछ समय बाद जब वह मोटरसाइकिल पर जा रही थी तो स्पीड ब्रेकर पर गिर गई थी। इस कारण पांव में काफी दर्द हुआ और चलने में दिक्कत होने लगी तो दूसरा ऑपरेशन कराया जो अच्छे से नहीं हुआ। वहीं, उन्हें इसके बाद उन्हें करनाल सिविल अस्पताल से बताया गया कि यह ऑपरेशन में करीब 10 लाख रुपये का खर्च आएगा और छह साल तक इलाज चलेगा। इसके बाद उन्हें किसी ने पीजीआई में इलाज कराने के बारे में बताया लेकिन जब वह यहां आए तो पीजीआई के किसी डॉक्टर ने उन्हें फेज-6 मेडिकल कॉलेज में जाने की सलाह दी। डॉ. अमित लखानी और डॉ. करन ने ऋतु का ऑपरेशन किया गया और इसके बाद उन्हें कुछ व्यायाम करने के लिए बताए गए तब से वह बिल्कुल ठीक है।


तीन साल से बिस्तर पर ही थी, चलने की खो दी थी उम्मीद
ऋतु ने बताया कि वह ऑपरेशन से पहले तीन साल से बिस्तर पर ही थी। उन्होंने चलने की उम्मीद ही खो दी थी। इतनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था कि हर समय घर के किसी न किसी सदस्य साथ रहना पड़ता था।
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परिवार के सदस्य की तरह ध्यान रखा, खून भी कराया मुहैया
ऋतु के भाई रविंदर ने बताया कि उनको एक बार भी ऐसा नहीं लगा कि वह अपने घर से दूर आए हैं या फिर उनके साथ कोई अनजान है। डॉक्टरों ने उनका ध्यान परिवार के सदस्य की तरह किया। और जब ऑपरेशन के समय खून की जरूरत थी तो डॉक्टरों ने अपने स्तर पर खून भी मुहैया कराया था। साथ ही भाई का कहना था कि उन्हें बहन की हालत देखकर रोना आता था लेकिन अगर आज वह चल पा रही है तो इन डॉक्टरों की वजह से चल पा रही है।

बिहार और पीजीआई में दिखाया, अब मोहाली एम्स ने खत्म किया दर्द
बिहार में बाइक पर चेचरे भाई के साथ जा रहे मोहम्मद शताब अनवर को टेंपो ट्रैवलर ने टक्कर मार दी थी। दो साल पहले हुए हादसे में भाई की मौत हो गई। वहीं उसका बाएं पैर की जांघ की हड्डी टूट गई। उन्होंने इसके कई ऑपरेशन करवाए लेकिन राहत नहीं मिली। पीजीआई में दिखाया तो ऑपरेशन के लिए छह महीने इंतजार करने को कहा। इसके बाद दर्द नहीं सह पाने के चलते जब डॉक्टर से जल्द ऑपरेशन करने को कहा तो उन्होंने मोहाली स्थित एम्स में जाने को कहा। अब यहां पर इलाज करवाने के बाद राहत महसूस कर रहा हूं।
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