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13 घंटे में पाक से पोस्ट छीनी थी, हक पाने में 15 साल लगे

Sun, 03 May 2015 05:03 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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18 हजार फुट पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची पोस्ट को सिर्फ 13 घंटे में फतह कर लेने वाले ब्रिगेडियर एसएस आहलुवालिया को अपना हक पाने के लिए 15 साल लग गए।
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साल 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में चंडीगढ़ सेक्टर-16 के रहने वाले ब्रिगेडियर आहलुवालिया को अपनी टांग खोनी पड़ी थी। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। बाद में उन्होंने वालंटेरी रिटायरमेंट ले ली।

इसके बाद उन्होंने रक्षा मंत्रालय से डिसेबिल्टी बेनेफिट की मांग की तो उन्हें यह नहीं दिया गया। ब्रिगेडियर आहलुवालिया ने इस बारे में आला अफसरों से बातचीत की, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला।
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सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

जब चंडीगढ़ में आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) की बेंच आई तो उन्होंने उसमें केस फाइल किया। साल 2010 में चंडीगढ़ बेंच ने आहलुवालिया के पक्ष में फैसला दे दिया। उसके बाद रक्ष मंत्रालय ने हाईकोर्ट में इसे चैलेंज कर दिया। हाईकोर्ट में भी आहलुवालिया को जीत मिली।

इसके बाद मंत्रालय ने वीर चक्र विजेता को मिलने वाले डिसेबिल्टी बेनेफिट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी। सुप्रीम कोर्ट में भी आहलुवालिया ने अपना पक्ष मजबूती से रखा और आखिर में जीत भी उनकी हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय की अपील खारिज कर दी और तुरंत आहलुवालिया को सभी बेनेफिट देने का फैसला दिया।

देश सेवा के बदले मिले धक्के
ब्रिगेडियर आहलुवालिया ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्होंनेदेश के लिए युद्ध लड़ा और बदले में सिर्फ धक्के मिले। जब मेरे साथ ऐसा सुलूक हो सकता है तो आम सैनिकों को कितनी मुसीबतें झेलनी पड़ती होंगी।
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आहलुवालिया के नाम रिकार्ड दर्ज

ब्रिगेडियर आहलुवालिया देश के उन शूरवीरों में शुमार हैं, जिन्होंने 1971 के युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। आहलुवालिया के नाम पर कारगिल के प्रतापपुर की तरफ 18 हजार फुट ऊंचाई पर स्थित पोस्ट को पाकिस्तानी सेना से जीतने का रिकार्ड दर्ज है।

वे मात्र 27 साल के थे और लद्दाख स्काउट्स में मेजर के पद पर थे। जब वे चोटी पर चढ़ रह थे, ऊपर से पाकिस्तानी सैनिक गोलीबारी कर रहे थे। इसमें उनकी टांग बुरी तरह से जख्मी हुई थी। वे फिर भी ऊपर बढ़ते गए और पोस्ट अपने कब्जे में ली।
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