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Chandigarh News: संघर्ष के चक्रव्यूह को तोड़कर अभिमन्यु ने जीता ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा’ पुरस्कार

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चंडीगढ़। अभाव इतना कि दिहाड़ी का काम भी किया। वेटर और बूट पॉलिस करने से भी नहीं चूके। बेशक उनके रास्ते में कई बाधाएं आईं, लेकिन संघर्ष के चक्रव्यूह को तोड़कर खुद के लिए मुकाम बनाया। ये हैं चंडीगढ़ के कलाकार अभिमन्यु। उन्होंने थिएटर एंड आर्ट में कास्टयूम डिजाइन के लिए ‘उस्ताद बिस्मिला खान युवा पुरस्कार’ जीता है।
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अभिमन्यु ने बताया कि उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। अपनी यात्रा के बारे में बताया कि 1999 में जब वे स्कूल जाते थे तो रास्ते में अभिनय करते कुछ कलाकारों को देखा। वहीं से थिएटर की तरफ उन्होंने रुख किया। अभिमन्यु सुदेश शर्मा, प्रवेश सेठी ओर तेजभान गांधी से बेहद प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि वे 18 वर्ष से इस क्षेत्र में हैं। सबसे पहले सेक्टर-24 के गुजरात भवन में दहेज प्रथा नाटक का निर्देशन किया था। उन्होंने बताया कि वे अभिनय के साथ-साथ निर्देशन भी करते हैं। साथ ही प्ले राइटिंग के रूप में भी काम करते हैं। उन्हें कास्टयूम डिजाइन के लिए यह पुरस्कार मिला है। उन्होंने कहा कि अभाव के कारण वे अधिक नहीं पढ़ पाए। उनके दादा चंडीगढ़ आए थे। उसके बाद चंडीगढ़ में ही रह गए।
ऐसे जोड़े दिल के तार
तीन वर्ष पहले एक रिश्तेदार की शादी में गए थे। वे डांस कर रहे थे। पसीना से तरबतर हो गए। उसी दौरान शादी में आई एक लड़की पानी लेकर आई। उन्होंने कहा कि पानी नहीं पीना है। वह लड़की रोने लगी। रोने का कारण पूछा तो पता चला कि वह लड़की न बोल सकती हे न सुन सकती है। उसी समय उन्होंने लड़की के माता पिता से कहा कि वह इस लड़की से शादी करना चाहते हैं। उसके बाद उनकी शादी को गई। अभी साथ में पत्नी, बेटी और मां साथ में रहती है।
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