चंडीगढ़। शहर के अस्पतालों में ब्रांडेड दवाओं की बजाय जेनेरिक दवाएं लिखने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र के विशेष सचिव के निर्देश पर स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने इस संबंध में पीजीआई समेत सभी अस्पतालों को निर्देश दे दिया है। जीएमसीएच- 32 में सभी मानक धराशायी हैं। डॉक्टर धड़ल्ले से मरीजों को ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। मरीज न चाहते हुए ब्रांडेड दवाएं खरीदने काे मजबूर हैं। जेनेरिक के नाम पर इक्का दुक्का मरीजों को एक दो दवाएं लिखकर अपना काम पूरा कर लिया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य सचिव के निर्देश का पालन करते हुए जीएमएसएच-16 में ब्रांडेड दवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने की व्यवस्था जारी है। डॉक्टरों पर पैनी नजर रखी जा रही है। ब्रांडेड दवा लिखने वालों से उसका कारण पूछा जा रहा है। वीरवार की ओपीडी में अमर उजाला संवाददाता ने जीएमसीएच- 32 में पीडियाट्रिक, हड्डी रोग, मनोरोग और मेडिसिन की ओपीडी की पड़ताल की। इस दौरान अलग अलग सात मरीजों से बात की। सभी के कार्ड पर सिर्फ ब्रांडेड दवाएं लिखी गई थीं।
मरीजों को इंतजार, यहां कब खुलेगा काउंटर
मरीजों की सहूलियत के लिए जीएमएसएच-16 में ओपीडी के प्रत्येक तल पर संबंधित विभागों का फार्मेसी काउंटर खोल दिया गया है। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों को कुछ हद तक राहत भी मिलने लगी है। जीएमसीएच-32 में इलाज के लिए आने वाले मरीजों का कहना है कि ये व्यवस्था सभी सरकारी अस्पतालाें में होनी चाहिए जिससे मरीज दलाल और ब्रांडेड दवाओं के चंगुल में फंसने से बच पाए, क्योंकि काउंटर खुलने पर अस्पताल प्रशासन को वहां हर हाल में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करानी होगी।
जीएमएसएच-16 में हो चुकी है कार्रवाई
सरकारी अस्पतालों में ब्रांडेड की बजाय जेनेरिक दवा लिखने के लिए केंद्रीय विशेष सचिव के आदेश का पालन करते हुए डॉक्टरों को सॉल्ट का नाम लिखने को कहा गया है। जीएमएसएच-16 में तो ऐसा न करने पर ईएनटी विभाग में डेपुटेशन पर तैनात एक महिला डॉक्टर को वापस उसके तैनाती स्थल पर भेज दिया गया है। इसे लेकर डॉक्टरों में डर का माहौल है, लेकिन वे दबी जुबान से यह कह रहे हैं कि सरकारी अस्पताल में दवाएं ही उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों का इलाज कैसे किया जाए।
दुकानों पर भी हो चुकी है कार्रवाई
गौरतलब है कि दवा की दुकानों पर गड़बड़ी रोकने के लिए पूर्व में ड्रग इंस्पेक्टरों द्वारा छापेमारी की जा चुकी है। उस दौरान पीजीआई, जीएमएसएच-16 और सिविल अस्पतालों के साथ ही जीएमसीएच-32 में भी गड़बड़ी पाई गई थी। यहां भी दुकान संचालक दवाओं की खरीद और बिक्री संबंधी रिकाॅर्ड को मानक के अनुसार नहीं रख रहे थे। इसके कारण उनकी दुकानों को दो से तीन दिन के बंद रखने की पैनल्टी लगाई गई थी।
इन विभागों में लिखी गई बाहर की दवाएं
कमरा नंबर- 5307 में बच्चों के लिए ताकत की ब्रांडेड दवा
मनोरोग विभाग के दो मरीजों को अलग-अलग दो-दो ब्रांडेड दवाएं
मेडिसिन के एक मरीज को बीपी, गैस और नसों की ताकत की ब्रांडेड दवाएं
हड्डी रोग विभाग के एक मरीज को एक ब्रांडेड दवा
जेनेरिक दवाओं को प्रमोट कर जरूरतमंद मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था बहाल की गई है। इसमें सभी सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों को भी शामिल किया गया है। धीरे धीरे सभी अस्पतालों में ब्रांडेड की बजाय जेनेरिक दवाओं को लिखने की व्यवस्था की जाएगी। जीएमएसएच-16 की ही तरह अन्य अस्पतालों से भी लगातार रिपोर्ट ली जा रही है।
- यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव