चंडीगढ़। सेक्टर-47 निवासी रश्मि सभरवाल और उनके पति विनोद सभरवाल ने टैग वेकेशन इंडिया लिमिटेड से 1.95 लाख रुपये में हॉलिडे पैकेज लिया था लेकिन कंपनी ने वादा किए गए छुट्टी पैकेज और सेवाएं प्रदान नहीं किए। इस पर जब शिकायतकर्ता कंपनी से संतुष्ट नहीं हुए तो उन्होंने कई बार ईमेल, व्हाट्सएप संदेश और औपचारिक पत्र भेजकर अपनी सदस्यता समाप्त करने और राशि की वापसी की मांग की लेकिन कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने मार्च 2023 में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने केस की गंभीरता को देखते हुए सात महीनों में ही फैसला पीड़ितों के हक में सुनाते हुए कंपनी को वसूले गए 1.95 लाख रुपये पर 10 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया।
रश्मि सभरवाल ने अदालत को बताया कि 3 मई 2023 को टैग वेकेशन इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने उनके घर आकर उन्हें एक फ्री छुट्टी का वाउचर प्रदान किया। इसके बाद, उन्हें विभिन्न हॉलिडे पैकेजों के बारे में बताया गया। इस पर उन्होंने 10 वर्ष गोल्ड पैकेज लेने के लिए मनाया गया। इसके लिए उन्होंने विभिन्न क्रेडिट कार्डों के माध्यम से कुल 1.95 लाख का भुगतान किया था परंतु उन्हें बाद में पता लगा कि कंपनी ने उन्हें मुफ्त छुट्टी का कूपन एक वर्ष के लिए मान्य कहकर दिया था। वह असल में केवल 6 महीने के लिए मान्य था। इसके अलावा उन्हें जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में मुफ्त भोजन और ठहरने की जगह की भी गारंटी दी गई थी लेकिन बाद में उपलब्धता के आधार पर सीमित कर दी गई। इसके साथ ही, उन्हें वार्षिक एएमसी शुल्क में छूट देने का भी आश्वासन दिया गया था, जिसे कंपनी ने पूरा नहीं किया। आयोग ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि कंपनी ने अपने वादों को को पूरा नहीं किया। जो उपभोक्ता के प्रति सेवा में कमी और अनुचित व्यापार है। इस पर आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता की ओर से दिए 1.95 लाख 10 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए।