चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है। विद्यार्थियों के बीच बढ़ते मानसिक तनाव को कम करने के लिए और उन्हें समस्याओं से निजात दिलवाने के लिए इंसान रूप में किताब उपलब्ध करवाई जाएगी। छात्रसंघ की ओर से वीरवार को मानव पुस्तकालय को लेकर स्वयंसेवकों के साथ बैठक की गई और मानव पुस्तकालय के लिए पंजीकरण शुरू कर दिया गया। छात्रसंघ अध्यक्ष जतिंदर सिंह ने बताया कि मानव पुस्तकालय का पहला कार्यक्रम 6 नवंबर को आयोजित करवाया जाएगा, अभी इसके लिए जगह तय की जानी है।
ये किताबें किसी ना किसी समस्या से निपटने में विशेषज्ञ होंगे और अपने जीवन की यात्रा के जरिए ये युवाओं को प्रेरित करेंगे। इसे शुरू करने का उद्देश्य हर तरह के लोगों के बीच सामाजिक संपर्क बनाना और उनके बीच के भ्रम को दूर करना है। इसकी मदद से युवाओं को किसी भी तरह के पूर्वाग्रह से बाहर आने में मदद मिलेगी।
मानव पुस्तकालय इंसानी किताबों का पुस्तकालय होगा। इसमें युवाओं का पंजीकरण उनके नाम की बजाय जिस समस्या से उन्होंने निजात पाई है, उसके आधार पर नाम रखा जाएगा। महीने में एक-दो कार्यक्रम करवाए जाएंगे। इसमें शिरकत कर विद्यार्थी अपनी मनपसंद इंसानी किताब ले सकते हैं। यानी वे इन व्यक्तियों के साथ कुछ वक्त बिता सकते हैं और उन मुद्दों पर बात कर सकते हैं, जिनमें वे महारत रखते हैं। पुस्तकालय में ऐसे लोगों को शामिल किया जाएगा जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत नहीं हारी और चुनौतियों को पार किया।
विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों के साथ बनाई है टीम
पीयू काउंसिल अध्यक्ष जतिंदर ने बताया कि वीरवार को बैठक कर विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों के साथ टीम बनाई गई है। इसमें कुछ विभागों के डीआर के साथ सामान्य विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया है। टीम की ओर से गूगल फॉर्म के जरिए ऑनलाइन और ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया करवाई जाएगी। वहीं मानव पुस्तकालय के प्रमोशन के लिए अलग टीम का गठन किया गया है। पहला कार्यक्रम 6 नवंबर को शाम 5 से 6 बजे तक किया जाएगा।
क्या है मानव पुस्तकालय
एक मानव पुस्तकालय में, पुस्तकों के स्थान पर आप इंसानों को ‘उधार’ ले सकते हैं। ये लोग अपनी अनूठी जीवन कहानियों के साथ अपने पाठकों को किताबों के रूप में प्रस्तुत करने वाले स्वयंसेवक होते हैं। एक निश्चित अवधि के लिए आप उनसे बातचीत कर सकते हैं, सवाल पूछ सकते हैं और उनकी कहानियां सुन सकते हैं।