वर्ष 1944 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वे इटली में लड़ाई में शहीद हो गए। उस समय पता नहीं लग पाया और परिजन भी उन्हें लापता मानकर चल रहे थे। उसके बाद जब युद्ध के शहीदों के कंकाल के टेस्ट हुए, तब पता लगा कि दो कंकाल एशिया मूल के लोगों के हैं। कंकालों का डीएनए 2010 में शुरू हुआ और 2012 में सभी तरह के टेस्ट के बाद स्पष्ट हो गया कि ये अस्थियां हिसार जिले के निवासी सिपाही पालू राम की हैं। उन्होंने बताया कि पालू राम के दो भाई थे। एक भाई और फौज में थे, जिनकी पहले ही मौत हो चुकी है। फिलहाल उनके छोटे भाई का परिवार है।