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75 साल बाद दो भारतीय शहीदों को नसीब हुई वतन की मिट्टी, ऐसे हुई थी पहचान

Tue, 04 Jun 2019 03:59 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार/अग्रोहा/झज्जर (हरियाणा)
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75 साल बाद वतन आईं अस्थियां - फोटो : अमर उजाला
द्वितीय विश्व युद्ध के शहीद नंगथला निवासी पालू राम और झज्जर जिले के नौगांवा गांव निवासी हरिसिंह की अस्थियां 75 साल बाद उनके पैतृक गांव लाई गईं। परिजनों को अंतिम निशानी के रूप में पालू राम की कब्र की मिट्टी एक डिबिया में मिली। इससे पहले भारतीय सेना की टुकड़ी ने मार्च पास्ट कर शहीद पालू राम को सलामी दी। 
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- फोटो : अमर उजाला
द्वितीय विश्वयुद्ध 1944 में नंगथला गावं के शहीद हुए पालू राम के अवशेष इटली से लाकर भारतीय सेना ने सम्मानपूर्वक सोमवार को उनके परिवार को सौंप दिए। पालू राम के परिवार में उनके छोटे भाई का परिवार ही चल रहा है, जिसमें उनके पोते-पड़पोते शामिल हैं। पालू राम के भाई के बेटे रामजीलाल ने अस्थियों को प्रणाम करते हुए कहा कि आज उनके परिवार की 75 साल की आस पूरी हुई है। वे लोग उनको आज तक लापता ही समझते थे लेकिन आज उन्हें गर्व है कि हमारे पूर्वज हिटलर की सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। कैप्टन प्रदीप ने बताया कि पालू राम 1942 में 17 वर्ष की आयु में ही सेना में भर्ती हो गए थे।
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वर्ष 1944 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वे इटली में लड़ाई में शहीद हो गए। उस समय पता नहीं लग पाया और परिजन भी उन्हें लापता मानकर चल रहे थे। उसके बाद जब युद्ध के शहीदों के कंकाल के टेस्ट हुए, तब पता लगा कि दो कंकाल एशिया मूल के लोगों के हैं। कंकालों का डीएनए 2010 में शुरू हुआ और 2012 में सभी तरह के टेस्ट के बाद स्पष्ट हो गया कि ये अस्थियां हिसार जिले के निवासी सिपाही पालू राम की हैं। उन्होंने बताया कि पालू राम के दो भाई थे। एक भाई और फौज में थे, जिनकी पहले ही मौत हो चुकी है। फिलहाल उनके छोटे भाई का परिवार है।

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इसी परिवार के सदस्य रामजी लाल से अनुमति ली कि शहीद के पार्थिव शरीर के अवशेष का इटली में अंतिम संस्कार किया जाएगा। कैप्टन प्रदीप के अनुसार इसके बाद डिफेंस की टीम हिसार कैंट से इटली गई और वहां से कुछ अवशेष लेकर दो जून को भारत पहुंची। पालू राम की अस्थियां अग्रोहा पहुंचने पर युवाओं की टोलियों ने इसकी अगुवाई की। बाइकों पर सवार युवा में जोश इतना था कि वे तिरंगा लिए हुए थे। ग्रामीणों ने वीर शहीद पालू राम अमर रहे, भारत माता की जय के नारे लगाए।
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शहीद हरिसिंह को मिली गांव की मिट्टी
इटली में करीब 75 वर्ष पूर्व शहीद हुए झज्जर जिले के नौगांवा गांव निवासी हरिसिंह की अस्थियां सेना के जवान व जिला सैनिक बोर्ड के अधिकारी उनके पैतृक गांव लेकर पहुंचे। ग्रामीण व आसपास के गांवों लोग तथा राजनेता गांव से करीब एक किलोमीटर पहले नहर के पुल पर बैंड बाजे के साथ पहुंच गए थे। जब सेना के अधिकारी हरिसिंह का अस्थि कलश लेकर गांव पहुंचे तो वहां पर जनसैलाब उमड़ पड़ा और शहीद हरिसिंह अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा हरि सिंह तेरा नाम रहेगा, भारत माता की जय के नारों से आसमान गूंज उठा।
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गांव में शहीद हरिसिंह के स्मारक के लिए ग्राम पंचायत की ओर से जमीन उपलब्ध करवाई जा रही है। अमर शहीद हरि सिंह मात्र साढ़े 17 वर्ष की आयु में 25 मार्च 1942 को सेना की 4/13 एफएफ राइफल में भर्ती हुए थे। सिपाही हरिसिंह 13 सितंबर 1944 को इटली के पोगियो एल्टो बैटल में शहीद हुए।
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वर्ष 1966 में युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की जांच शुरू हुई, और डीएनए व अन्य जांच के आधार पर 2012 में यह पाया गया कि यह गैर यूरोपियन सैनिक हैं और इनकी शहादत के समय इनकी आयु लगभग 21 वर्ष रही होगी। इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया और वर्ष 2017 जांच दल इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि यह दोनों वीर योद्धा भारत में हरियाणा के सिपाही हरि सिंह व सिपाही पालूराम हैं।
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इनके परिवारों से सहमति लेकर इन दोनों वीर सैनिकों का अंतिम संस्कार धार्मिक रीति रिवाज के साथ इटली में गिरोनई में किया गया और गिरोनई युद्ध स्मारक पर इनके नाम अंकित किए गए। दिल्ली एयरपोर्ट से अमर शहीद हरि सिंह की अस्थियां लेकर पहुंचे सेना के सूबेदार जगरत्न ने बताया कि नेशनल डिफेंस कॉलेज की टीम एयर वाइस मार्शल बकुल उपाध्याय के नेतृत्व में इटली गई। सेना के उच्चाधिकारियों की टीम अमर शहीद सिपाही हरि सिंह और हिसार से अमर शहीद सिपाही पालुराम की अस्थियां पूरे सैनिक सम्मान के साथ इटली से लेकर आई है। 
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