हरियाणा में एमबीबीएस बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में आंदोलनरत एमबीबीएस विद्यार्थियों और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) में कोई सहमति नहीं बन रही। डीएमईआर के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया और चारों सरकारी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच करीब एक घंटे तक चली बैठक बेनतीजा रही।
हालांकि, निदेशक ने विद्यार्थियों के आपत्ति बिंदुओं को नोट किया और आश्वासन दिया कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने रखेंगे। साथ ही जल्द ही विद्यार्थियों की मुलाकात मुख्यमंत्री से कराई जाएगी। इन तमाम आश्वासनों के बावजूद डॉ. दहिया विद्यार्थियों को आंदोलन वापस लेने के लिए नहीं मना पाए।
बैठक के बाद एमबीबीएस विद्यार्थियों ने ऐलान किया कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। रोहतक पीजीआई में चल रहे आंदोलन के चलते डीएमईआर ने आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों को बैठक के लिए बुलाया था। सोमवार सुबह रोहतक पीजीआई, खानपुर मेडिकल कॉलेज, करनाल और मेवात मेडिकल कॉलेज के करीब 30 विद्यार्थी पंचकूला सेक्टर 22 स्थित चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय पहुंचे।
यहां पर निदेशक डॉ. आदित्य दहिया से उनकी बैठक हुई। बैठक में विद्यार्थियों ने एक एक करके बॉन्ड पॉलिसी की खामियां गिनाई। साथ ही मांग रखी कि बॉन्ड पालिसी में संशोधन किया जाए। निदेशक ने बिंदूवार विद्यार्थियों से बात की और आश्वासन दिया कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सामने रखेेंगे।
डॉ. दहिया ने विद्यार्थियों को आंदोलन वापस लेने के लिए मनाया, लेकिन विद्यार्थी मौखिक की बजाय लिखित आश्वासन की मांग पर अड़े रहे। गौरतलब है कि एमबीबीएस की काउंसलिंग के समय से ही विद्यार्थी बॉन्ड पॉलिसी का विरोध कर रहे हैं। 1 नवंबर से पीजीआई रोहतक में विद्यार्थी धरने पर बैठे हैं।
निदेशक ने आश्वासन दिया है कि वह जल्द ही उनकी मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराएंगे। फिलहाल हमारे पास लिखित में कुछ भी नहीं है और न ही पॉलिसी में अभी तक कोई संशोधन की बात सामने आई है। इसलिए विद्यार्थियों का आंदोलन जारी रहेगा।
- पंकज कुमार, प्रतिनिधि, एमबीबीएस स्टूडेंटस ऑल गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज आफ हरियाणा।
फाइनेंशियल नहीं सर्विस का हो बांड
एमबीबीएस विद्यार्थियों की मांग है कि सरकार बॉन्ड को फाइनेंशियल न बनाकर सर्विस बॉन्ड बनाए। बॉन्ड सरकार और एमबीबीएस विद्यार्थियों के बीच में हो, इसमें बैंक नहीं होना चाहिए। बॉन्ड की समय अवधि 7 की बजाय एक साल की जाए और कोई बीच में बॉन्ड तोड़ता है तो उसके लिए राशि 5 लाख रुपये हो। साथ ही डिग्री करने के आगामी दो माह में नौकरी सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री पहले ही कर चुके स्थिति साफ
बॉन्ड पॉलिसी को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले ही स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। उनका कहना है कि बॉन्ड पॉलिसी गलत नहीं है। बॉन्ड की शर्तें पूरी करने वाले विद्यार्थियों का लोन सरकार भरेगी, जबकि बॉन्ड पूरा नहीं करने वालों को लोन चुकाना होगा। रोहतक में पहले एक बार विद्यार्थी मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन वहां पर भी सीएम ने साफ संकेत दिए थे कि पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अब दूसरी बैठक में सरकार पीछे हटेगी या विद्यार्थी यह बैठक के बाद तय होगा।