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आपबीती: ब्लू व्हेल का टास्क पूरा करने के लिए नस काटी, किताबें जलाईं और आखिर में...

Thu, 07 Sep 2017 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट(पंजाब)
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Blue Whale Game - फोटो : File Photo
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दुनिया भर में बच्चों की जान ले रहे गेम ब्लू व्हेल का पंजाब में पहला मामला सामने आया है। शहर के आर्मी स्कूल में पढ़ रहे प्लस-वन (नान मेडिकल) स्टूडेंट ने ब्लू व्हेल गेम के  टास्क को पूरा करने के चक्कर में बेड पर स्टूल रख पंखे से लटक कर जान देने की कोशिश की। ऐन वक्त पर परिवार वालों के देख लेने पर स्टूडेंट को बचा लिया गया। 
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इससे पहले स्टूडेंट ने गेम के टास्क पूरे करने के लिए अपनी किताबें आग लगाकर जला डाली। इसके बाद बाजू की नस काटने की कोशिश की और रात के वक्त घर की छत व घर के बाहर घूमा। गेम के टास्क पूरे करने के लिए देर रात नहाना और जागना स्टूडेंट की आदत बन गई थी। स्टूडेंट ने 10 दिनों से स्कूल जाना भी छोड़ दिया। 

उसे मानसिक तनाव में देख परिवार वाले सिविल अस्पताल पठानकोट में मनोरोग विशेषज्ञ डा. सोनिया मिश्रा के पास इलाज करवाने पहुंचे, तब जाकर स्टूडेंट ने ब्लू व्हेल चैलेंज गेम के टास्क पूरे करने खुलासा किया। परिवार वालों ने डाक्टर मिश्रा को बताया कि उनका बेटा रात-रात जागता था। उन्होंने सोचा कि बच्चा उनका पढ़ाई कर रहा है। आगे पढ़िए...
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blue whale - फोटो : blue whale
बाद में बेटे को रात भर जागने, रात के वक्त छत पर चढ़ने व रात को घर से बाहर निकल जाने पर उन्हें शक पैदा हुआ। फिलहाल सिविल अस्पताल में बच्चे की काउंसलिंग की जा रही है। वहीं डॉ. सोनिया मिश्रा ने बताया बच्चेे की काउंसलिंग जारी है। परिवार को हिदायत दी गई है कि  फिलहाल बच्चे को मोबाइल, कंप्यूटर से दूर रखें। बच्चे पर मानसिक तनाव का असर है।

बच्चों पर नजर रखें अभिभावक: डीसी
पठानकोट। जानलेवा मोबाइल गेम ब्लू व्हेल के संदर्भ में डीसी नीलिमा ने जिलेवासियों से अपने बच्चों पर नजर रखने की अपील की है। डीसी ने कहा कि जिले में ब्लू व्हेल गेम का पहला मामला ध्यान में आया है और यह चिंता का विषय है कि कुछ और बच्चे भी इसमें शामिल हो सकते हैं। इसलिए लोग अपने बच्चों पर नजर रखें और यदि किसी तरह का कोई अन्य मामला सामने आता है तो सिविल अस्पताल अधिकारियों के साथ संपर्क करें, ताकि समय रहते बच्चे का मानसिक तौर पर इलाज किया जा सके। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए है कि कोई भी विद्यार्थी मोबाइल स्कूल में लेकर न आए। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का फर्ज बनता है कि अगर कोई ऐसी घटना ध्यान में आए तो इसकी सूचना प्रशासन को दें ।
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