1083 मेगावाट में से 400 मेगावाट के प्रोजेक्ट लगाने के लिए निवेशकों ने किसानों से जमीन खरीद ली है या फिर लीज पर ली है। इसमें निवेशकों ने अनेक किसानों को कृषि लोन भी भरा है। डिस्कॉम की आपत्ति के कारण निवेशक अब आगे नहीं बढ़ पा रहे। प्रति 50 मेगावाट का प्रोजेक्ट लगाने के लिए एक निवेशक छह से सात करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है। अधिकांश निवेशक प्रदेश के बाहर से हैं।
निवेशकों ने खटखटाया ऊर्जा मंत्री का दरवाजा
सौर ऊर्जा योजना के तहत प्रोजेक्ट लगाने के लिए निवेश कर चुके निवेशकों ने ऊर्जा मंत्री रणजीत चौटाला का दरवाजा खटखटाया है। निवेशकों ने उनसे डिस्कॉम के साथ योजना को लेकर चला आ रहा गतिरोध खत्म करने की गुहार लगाई है। ऊर्जा मंत्री रणजीत चौटाला ने निवेशकों को आश्वस्त किया है कि वे इस मसले पर सीएम मनोहर लाल से जल्दी उच्च स्तरीय बैठक बुलाने के लिए बात करेंगे। सूत्रों के अनुसार जनवरी महीने में यह बैठक होने की उम्मीद है।
सीएम पर टिका योजना का भविष्य
सौर ऊर्जा योजना आगे बढ़ेगी या फिर एक बार निरस्त होगी, यह फैसला सीएम मनोहर लाल पर टिका हुआ है। सीएम जल्दी ही डिस्कॉम, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड, ऊर्जा विभाग व ऊर्जा मंत्री के साथ बैठक कर इस पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं, चूंकि निवेशक के करोड़ों रुपये दांव पर लगे हुए हैं। अगर योजना रद्द होती है तो निवेशकों को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा और गलत संदेश भी जाएगा।
मुद्दा विचाराधीन, सरकार के स्तर पर होना है निर्णय: शत्रुजीत कपूर
डिस्कॉम के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शत्रुजीत कपूर का कहना है कि यह मुद्दा विचाराधीन है। सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय होना है। सरकार के निर्णय अनुसार आगे बढ़ा जाएगा। इसमें बिजली दरों से जुड़ा मामला भी है। सौर ऊर्जा को प्रदेश में सरकार ने बहुत प्रमोट किया है, लेकिन बिजली कंपनियों को भी बड़ी मुश्किल से फायदे में लाए हैं। नहीं चाहते कि जल्दीबाजी में कोई निर्णय लेकर भविष्य के लिए परेशानी खड़ी की जाए, जिससे जनता पर बोझ पड़े।