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Chandigarh News: 16 लाख प्रवासी मतदाताओं को साधने की फिराक में भाजपा

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::पार्टी की रणनीति::
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-पूर्व ओएसडी अमरेंद्र सिंह और अभिनेता मनोज तिवारी को सौंपी जिम्मेदारी
-यूपी और बिहार के भी कई नेताओं को प्रचार के लिए लाने की तैयारी
-प्रदेश की पांच सीटों पर मतदाताओं की संख्या अधिक
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में इस बार के लोकसभा चुनावों में प्रवासी मतदाता भी अहम रोल अदा करेंगे। एक आंकलन के मुताबिक, प्रदेश में करीब 16 लाख मतदाता हैं और यह प्रदेश की करनाल, सोनीपत, रोहतक, अंबाला, गुरुग्राम और फरीदाबाद सीटों को प्रभावित करते हैं। इन पांचों शहरों में प्रवासी मतदाताओं की संख्या अधिक है। इनको साधने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने खास रणनीति तैयार की है। भाजपा हरियाणा में प्रचार के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से नेता से लेकर अभिनेता को हरियाणा में लाएगी, ताकि इन मतदाताओं को वोट को भाजपा के पक्ष में भुनाया जाए।
भाजपा ने मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी अमरेंद्र सिंह की करनाल लोकसभा में पूर्वांचली मतदाताओं को साधने की जिम्मेदारी दी है। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश से आते हैं और ओएसडी रहते हुए वह लगातार पूर्वांचली लोगों के कार्यक्रमों में शिरकत करते रहे हैं। इसी प्रकार, छठ पर्व पर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी करनाल और पानीपत में प्रवासियों के साथ पर्व मना चुके हैं। अमरेंद्र सिंह ने प्रवासी मतदाताओं के बीच जाकर प्रचार शुरू कर दिया है। वहीं, एनसीआर के जिलों की जिम्मेदारी भोजपुरी के प्रसिद्ध गायक और अभिनेता मनोज तिवारी को दी गई है। वह गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक और सोनीपत में प्रवासियों को भाजपा के लिए साधने का काम करेंगे।
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कहां पर कितने प्रवासी मतदाता
सबसे अधिक प्रवासी मतदाता फरीदाबाद में 7 लाख के करीब हैं। हर छोटे और बड़े चुनावों में प्रवासी मतदाताओं का रुख ही जीत और हार तय करता है। इसी प्रकार, गुरुग्राम लोकसभा में 4.25 लाख, करनाल-पानीपत लोकसभा में 1.75 लाख, हिसार में 1 लाख अंबाला-यमुनागर में 2 लाख और कुरुक्षेत्र में 50 हजार प्रवासी मतदाता हैं। इनके अलावा, भी प्रदेश की शेष सीटों पर 10 हजार से लेकर 20 हजार तक प्रवासी मतदाताओं की संख्या है। प्रदेशभर में करीब 4 हजार प्रवासी लोग तो बुढापा पेंशन तक ले रहे हैं।
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पिछले पांच साल में बढ़े प्रवासी मतदाता
हरियाणा में पहले प्रवासी लोगों के लिए हरियाणवी होने के लिए 15 साल का रहना अनिवार्य था, लेकिन साढ़े चार साल पहले मनोहर लाल ने बतौर मुख्यमंत्री रहते इस शर्त को हटाया और पांच साल से हरियाणा में रहने वालों को हरियाणवी मानने का फैसला जारी किया। परिवार पहचान पत्र शुरू होने के बाद सरकार ने यह फैसला लिया था। इसका प्रवासी लोगों को खासा लाभ मिला और प्रदेश और केंद्र सरकार की योजनाओं का वह सीधा लाभ ले रहे हैं।
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