हरियाणा में अफसरशाही की उठापटक में भाजपा विधायकों की पूरी तरह से चलने का माहौल काफी समय से बना हुआ था। उम्मीद जताई जा रही थी कि डीसी, एसपी, एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारियों की पोस्टिंग में विधायकों का पूरा दखल रहेगा, लेकिन तबादलों के पहले चरण में आई एचसीएस अधिकारियों की सूची में भाजपा विधायकों की एक नहीं चली है। सरकार ने अपने नजरिए से एसडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट लगाए हैं। अब आईएएस की तबादला सूची किसी भी समय जारी हो सकती है।
विधायकों की निगाहें इसमें बदले जाने वाले डीसी और अन्य उच्च अधिकारियों पर टिक गई हैं। अगर इसमें भी विधायकों की इच्छा अनुसार अफसर नहीं लगाए गए तो असंतुष्ट विधायकों में सरकार के प्रति असंतोष और गहरा सकता है। चूंकि एचसीएस के तबादलों में विधायकों की एक नहीं चली है। इसका प्रमाण मुलाना की भाजपा विधायक संतोष सारवान के बेटे को एसडीएम के पद से हटाकर कम महत्व के पद पर नियुक्ति देना है।
भले ही एचसीएस सुशील सारवान को अपने गृह जिला अंबाला में नागरिक सुरक्षा का संयुक्त नियंत्रक के पद पर नियुक्ति मिली है, लेकिन उनका रुतबा तो कम हुआ ही है। सरकार ने आईएएस के स्थानांतरण एवं नियुक्ति आदेशों में भाजपा विधायकों को संतुष्ट नहीं किया तो उनका आक्रोश फिर फूट सकता है, चूंकि सरकार की नीतियों से नाखुश चल रहे 16 विधायक पहले ही मोर्चा खोले हुए हैं।