कृषि विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) भी खड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे के बाद भाजपा और शिअद में दूरियां बढ़ने लगी हैं। यदि शिअद-भाजपा गठजोड़ खत्म होता है तो इसका पहला असर चंडीगढ़ में दिखेगा। अगले साल चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव हैं। यहां पर अकाली दल के बड़ी संख्या में समर्थक हैं। यदि गठजोड़ खत्म होगा तो शिअद और भाजपा के मत बंटेंगे। ऐसे में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। हर चुनाव चाहे वह लोकसभा या नगर निगम का चुनाव हो।
दोनों ही चुनाव भाजपा और अकाली दल ने मिलकर लड़े हैं। लोकसभा में भाजपा उम्मीदवार को शिअद का भरपूर समर्थन मिला है। नगर निगम के बनने से लेकर हर चुनाव में भाजपा और शिअद में गठबंधन रहा है। गठबंधन के तहत शिअद को चार सीटें हमेशा मिली हैं। पिछले नगर निगम के चुनाव में चार में से मात्र एक ही सीट वार्ड नंबर दस पर चंडीगढ़ शिअद के प्रधान हरदीप सिंह बुटेरला की जीत हुई। वहीं एक सीट शिअद को गंवानी पड़ी जबकि हरजिंदर कौर का नामांकन रद्द हो गया था।
हाईकमान तय करेगी गठबंधन रहेगा या नहीं
शिअद चंडीगढ़ के प्रधान हरदीप सिंह बुटेरला का कहना है कि पार्टी की बैठक होनी है। उसमें आगे की रणनीति तय होगी। चंडीगढ़ इकाई पार्टी के हर फैसले को स्वीकार करेगी। पार्टी हाईकमान को तय करना है कि गठबंधन रहेगा या नहीं। शिअद की चंडीगढ़ इकाई भी किसानों के साथ है। किसानों को बीच मजधार में छोड़ नहीं सकते हैं।