हरियाणा विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा और हजकां गठबंधन टूटने की कगार तक पहुंच गई है।
हजकां अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर साफ कह दिया है कि दोनों पार्टियों के बीच लगभग तीन साल पहले हुए समझौते के मुताबिक ही विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा मंजूर होगा।
साथ ही कुलदीप ने यह शिकायत भी की है कि कई बार कोशिशों के बावजूद शाह से मुलाकात का समय नहीं दिया जा रहा है और न ही फोन पर बातचीत हो पा रही है।
बिश्नोई के मुताबिक सितंबर 2011 में हुए समझौते के तहत भाजपा और हजकां को 45-45 सीटों पर चुनाव लड़ना है और बहुमत की स्थिति में पहले ढाई साल कुलदीप बिश्नोई मुख्यमंत्री के उम्मीदवार होंगे और बाद के ढाई साल में भाजपा से सीएम होगा।
उल्लेखनीय है कि हाल ही ऐसी खबरें आई थीं कि अमित शाह ने बिश्नोई से एक मुलाकात में साफ कर दिया है कि विधानसभा चुनाव में गठबंधन तभी होगा जब हजकां 25 सीटों पर राजी हो और साथ ही उसे सीएम पद से दावा भी छोड़ना पड़ेगा। बिश्नोई का यह पत्र शाह की उसी शर्त का जवाब माना जा रहा है। साफ है कि कुलदीप ने पत्र के जरिये अपना रुख साफ कर दिया है कि हजकां को शाह की नई शर्त मंजूर नहीं है।
लोकसभा चुनाव में हरियाणा में शानदार प्रदर्शन के बाद से राज्य भाजपा के नेताओं की ओर से हजकां से गठबंधन तोड़ने के लिए लगातार पार्टी नेतृत्व पर दबाव डाला जा रहा है। अब हजकां अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने रविवार को भाजपा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में यह संदेश दिया गया है कि अगर भाजपा की ओर से सीटों के बंटवारे पर जल्द ही निर्णय नहीं लिया गया तो दोनों पार्टियों की राहें जुदा हो सकती हैं।
हजकां अध्यक्ष ने भाजपा अध्यक्ष को लिखी तीन पेज की चिट्टी में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के समय हुए दोनो पार्टियों के लिखित गठबंधन का भी जिक्र किया है।
कुलदीप के पत्र के मुताबिक गठबंधन में यह भी तय हुआ था कि विधानसभा चुनाव हजकां के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। हालांकि भाजपा के हरियाणा प्रभारी प्रो. जगदीश मुखी ने साफ कर दिया है कि बदली परिस्थितियों में हजकां को नए फार्मूले के तहत ही सीटें दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि भी कहा है कि यह हजकां पर निर्भर करता है कि वह गठबंधन चाहती है या नहीं। जबकि दूसरी तरफ हजकां अपनी मांगों पर कायम है। दोनों दलों के तेवरों से साफ हो गया है कि अब इस गठबंधन के बने रहने के आसार बहुत कम हैं।