घर के किराए से जुड़ी एक रेंट अपील पर सुनवाई करते हुए जिला अदालत ने पूर्व डिप्टी मेयर और बीजेपी पार्षद हीरा नेगी और उनके पति को सेक्टर-7सी स्थित कोठी को खाली करने का आदेश दिया है। अदालत ने इसके लिए उन्हें और उनके पति को दो महीने का वक्त दिया है। हीरा नेगी पिछले करीब साढ़े 3 वर्ष से कोठी की पहली मंजिल में किराए पर रह रहीं हैं। अदालत ने वीरवार को यह आदेश कोठी की मालकिन सेक्टर-8सी निवासी मधु कालरा और उनके पति गौरी शंकर की रेंट अपील पर फैसला सुनाया। मजेदार बात यह है कि मकान के जिस हिस्से पर कब्जे को लेकर विवाद है उसे एक वक्त हीरा नेगी ने ही बाउंसर्स से खाली करवाया था। इसके बाद से वह खुद यहां रहने लगीं।
याचिकाकर्ता दंपति ने हीरा नेगी और उनके पति शेर सिंह के खिलाफ उनके घर का फर्स्ट फ्लोर खाली करवाने को लेकर अप्रैल 2015 में कोर्ट में अपील दायर की थी। इसमें मधु कालरा ने कहा था कि उन्होंने 20 नवंबर 2014 को उक्त कोठी के मालिक अतुल राय मरवाह, सुनीता मरवाह और शिवानी मरवाह से खरीदा था। 29 जनवरी 2015 को इस्टेट ऑफिस ने मकान उनके नाम ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद बाद याचिकाकर्ता ने हीरा नेगी और शेर सिंह को मकान का पिछला किराया देने और इसे खाली करने को कहा था। इस पर प्रतिवादी पक्ष ने किराया भरने के साथ ही मकान खाली करने से मना कर दिया। आरोप के अनुसार प्रतिवादी पक्ष हर बार पुलिस को बुला लेता था और हंगामा करता था। साथ ही मकान की रिपेयरिंग और रेनोवेशन को रुकवा देता था।
मधु ने कोठी में काम करने वालों को धमकाने का भी आरोप लगाया है। साथ ही हीरा नेगी राजनीतिक संगठन से होने के कारण लोगों को घर बुलाती थी और उन्हें धमकाती थीं। कई बार वह उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दे चुकी थीं। उनके अनुसार उन्होंने फरवरी 2013 में हीरा नेगी को कोठी का फर्स्ट फ्लोर 18000 रुपये महीने के किराए पर रेंट पर दिया था। जनवरी 2014 तक ही उन्होंने किराया दिया उसके बाद से कभी किराया नहीं दिया।
बाउंसर्स से खाली करवाया था मकान
नवंबर 2015 में कोर्ट में दाखिल जवाब में हीरा नेगी की ओर से कहा गया था कि उन्होंने मकान के पूर्व मालिकों से कोठी की पहली मंजिल किराए पर ली थी। नेगी के अनुसार उन्होंने इसकी मरम्मत पर 7 लाख रुपये खर्च किए थे। पूर्व मकान मालिक ने उनसे वायदा किया था कि वह कोठी का फर्स्ट फ्लोर उन्हें बेच देंगे। उनका कहना था कि पुराने मालिक ने नए मालिक के साथ साजिशन उन्हें मकान बेच दिया। वहीं अपने जवाब में उन्होंने याचिकाकर्ता पक्ष को किसी भी तरह से धमकाने के आरोप से मना किया।
हीरा नेगी ने अपने हलफनामे में कहा था कि वह एक पार्षद हैं, जिसके नाते पूर्व मालिकों अतुल राय मरवाह और सुनीता मरवाह ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने उनसे कहा था कि उनके घर की पहली मंजिल पर कुछ बाउंसर्स रहते हैं और रोजाना हंगामा करते हैं। मकान मालिक घर बेचना चाहते थे, लेकिन बाउंसरों के डर से बेच नहीं पा रहे थे। अतुल राय इस बात पर माने की अगर वह घर खाली करवा दें तो वह उन्हें पहली मंजिल वाला हिस्सा किराए पर दे देंगे। इसके बाद उन्होंने घर के उक्त हिस्से को बाउंसरों से खाली करवाया था।