हरियाणा के पांचों नगर निगमों के चुनाव जीतने को भाजपा को फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे। इसलिए जिस तरह से चुनाव लड़ने वालों ने दावेदारी जताई है, उससे भाजपा का प्रदेश नेतृत्व और हाईकमान सतर्क हो गया है। चुनाव जीतने के लिए भाजपा को जहां विपक्ष की रणनीति से पार पाना होगा, वहीं मेयर का टिकट न मिलने पर बागी तेवर अपनाने वालों के भितरघात से निपटने के लिए बिसात बिछानी होगी। हरियाणा में पहली बार मेयर का चुनाव सीधे हो रहा है। अब पार्षदों का कोई रोल मेयर चुनने में नहीं है, जिससे पांच साल का कार्यकाल पूरा करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। मेयर शहर की छोटी सरकार होंगे, विधायक से ज्यादा उनका नगर निगम के एरिया में रुतबा होगा, वहीं जनता अपने क्षेत्र के काम कराने के लिए विधायक के बजाए मेयर के दरबार में हाजिरी लगाएगी। किसी-किसी नगर निगम में तो तीन-तीन विधायकों का क्षेत्र भी पड़ रहा है।
ऐसे में उन्हें भी नगर निगम के तहत आने वाले क्षेत्र में काम कराने के लिए मेयर को ही संपर्क करना पड़ेगा। मेयर इतना शक्तिशाली होगा कि विधायक लॉबिंग कर पार्षदों के जरिए भी उसकी कुर्सी छीन नहीं पाएंगे। सत्ता बदलने के बाद भी मेयर कुर्सी पर बने रहेंगे, चूंकि पांच साल का कार्यकाल उन्हें पूरा करना ही है। गड़बड़ी करने पर सरकार ही अपनी शक्तियों का प्रयोग कर मेयर को पद से हटा सकती है। यही कारण है कि भाजपा में मेयर पद पाने के लिए पांच नगर निगमों में लगभग सौ आवेदन आए हैं। आवेदनकर्ता भी बेहद प्रभावशाली हैं, जो कि प्रदेश से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच रखने वाले हैं। मेयर का टिकट पाने के लिए सभी अपनी-अपनी जुगत भिड़ा रहे हैं।
करनाल-रोहतक में सीएम की पंसद ही चलेगी
करनाल में जहां सीधे-सीधे मेयर पद का प्रत्याशी सीएम की पसंद का होगा, वहीं रोहतक में भी उनके ही पसंदीदा को टिकट मिल सकता है, चूंकि करनाल उनका गृह विधानसभा क्षेत्र है तो रोहतक उनका घर। भाजपा दोनों ही नगर निगमों में मेयर पद पर हर हाल में जीत दर्ज करना चाहेगी। उसके लिए मेयर पद के लिए आवेदन करने वालों का प्रोफाइल और उनकी जनता में पैठ का गहन अध्ययन किया जा रहा है। भाजपा ऐसा प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है, जो सर्वमान्य हो और उसका कम से कम विरोध अन्य दावेदार करें, ताकि चुनाव में अधिक भितरघात का सामना न करना पड़े। यमुनानगर, पानीपत और हिसार में संबंधित मंत्रियों के साथ ही विधायकों व वरिष्ठ भाजपा नेताओं की पसंद को भी तरजीह दी जाएगी।
प्रभारी मंत्रियों के हाथ सबसे कठिन काम
भाजपा चुनाव समिति ने सबसे कठिन काम भाजपा के प्रभारी मंत्रियों को थमाया है। नगर निगम चुनाव के जिलों वाले प्रभारी मंत्रियों को संगठन के अन्य दो-तीन नेताओं के साथ मिलकर ही मेयर पद के प्रत्याशी का पैनल तय करना होग, जिस पर अंतिम मुहर चुनाव समिति पहली या दो दिसंबर को दिल्ली में लगाएगी। दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है, ऐसे में तीन से चार नाम पैनल में शॉर्टलिस्ट करना आसान नहीं है।
भाजपा फ्रंटफुट पर, इनेलो-कांग्रेस पिछड़े
मेयर पद के प्रत्याशियों का चयन करने के लिए भाजपा चुनाव समिति की पहली बैठक हो चुकी है, पार्टी ने उम्मीदवारों की घोषणा करने के लिए तिथि भी तय कर दी है, जबकि इनेलो और कांग्रेस अभी पिछड़े हुए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर चुनाव वाले जिलों में रायशुमारी कर रहे हैं, लेकिन गुटबाजी के चलते यह ही तय नहीं हो पा रहा कि चुनाव सिंबल पर लड़ें या नहीं। उधर, इनेलो पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक तो हो चुकी है, लेकिन प्रत्याशियों के चयन को लेकर सब अंदरखाने ही चल रहा है।