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भारत-कनाडा विवाद: ट्रांसपोर्ट से लेकर खेती तक पर पंजाबियों का कब्जा, खटास बढ़ी तो पिसेंगे कारोबारी

Sat, 23 Sep 2023 05:22 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

हरपाल सिंह संधू ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि अब पंजाबी कनाडा में काफी आगे निकल चुके हैं। कनाडा में कारोबार पंजाबी मूल के लोगों के बिना सोचा भी नहीं जा सकता। पंजाब के लोग मेहनतकश हैं और इसी का नतीजा है कि ट्रांसपोर्ट से लेकर खेतीबाड़ी तक पंजाबी लोगों का कब्जा है।
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भारत कनाडा विवाद - फोटो : प्रतीकात्मक
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विस्तार
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भारत और कनाडा के बीच इन दिनों माहौल ठीक नहीं है। ऐसे में अगर खटास बढ़ती है तो कारोबारियों को नुकसान होना तय है। कनाडा से भारत में दालें, अखबारी कागज, वुड पल्प, एस्बेस्टस, पोटाश, लौह कबाड़, तांबा, धातु और औद्योगिक रसायन का आयात होता है। 2016 से अब तक कनाडा के कुल दाल निर्यात का 29 फीसदी हिस्सा भारत आया है।

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इसके अलावा आर्टिफिशियल ज्वेलरी, बासमती चावल, चाय, गुड़, गेहूं इत्यादि खाद्यान्न जो पंजाबी मूल के लोग पसंद करते हैं, यहां से निर्यात होता है। भारत और कनाडा के बीच विदेशी नीति, व्यापार, निवेश, वित्त और ऊर्जा के मसलों पर तमाम मंत्री स्तरीय वार्ता के जरिये रणनीतिक साझेदारी कायम की गई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच अगर खटास बढ़ी तो निश्चित तौर पर कारोबारियों को अधिक नुकसान होगा। कनाडा में ट्रांसपोर्ट से लेकर खेती तक पंजाबियों का कब्जा है। यही नहीं पंजाब की कई नामचीन हस्तियां कनाडा की नागरिक हैं।

यह भी पढ़ें: कनाडा-भारत तनाव: हरदीप निज्जर के आवास पर एनआईए ने चिपकाया नोटिस, पंजाब में टारगेट किलिंग का मास्टरमाइंड था
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पंजाबी मूल के बिना नहीं सोच सकते कनाडा में कारोबार
हरपाल सिंह संधू ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि अब पंजाबी कनाडा में काफी आगे निकल चुके हैं। कनाडा में कारोबार पंजाबी मूल के लोगों के बिना सोचा भी नहीं जा सकता। पंजाब के लोग मेहनतकश हैं और इसी का नतीजा है कि ट्रांसपोर्ट से लेकर खेतीबाड़ी तक पंजाबी लोगों का कब्जा है। कनाडा व भारत के बिगड़ते रिश्तों से चिंता होना स्वभाविक है, लेकिन पंजाबी मूल के लोगों की खासियत है कि वह अपनी मिट्टी से जुड़े हैं। कनाडा के वरिष्ठ लेखक जोगिंदर बासी का कहना है कि भारत और कनाडा के बीच विदेशी नीति, व्यापार, निवेश, वित्त और ऊर्जा के मसलों पर तमाम मंत्री स्तरीय वार्ता के जरिये रणनीतिक साझेदारी कायम की गई है। दोनों देशों के बीच आतंकवाद निरोधक, सुरक्षा, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग कायम किया जाता रहा है।

पंजाबियों का कनाडा में बज रहा डंका
कनाडा में रजोत ओबेराय, संदीप सिंह बराड़, शीना अलंगर वहां के जाने माने शिक्षाविद हैं। डॉ. रंजन जाने माने रोग विशेषज्ञ हैं। जसवंत दास, बलजीत सिंह चड्ढा हरबंस सिंह दोमान, जसपाल अटवाल व भाटिया वहां के प्रसिद्ध उद्योगपति व व्यापारी हैं। जसवंत दास मूलरूप से जालंधर के रहने वाले हैं और टोरंटो में इस समय नामवर कारोबारी हैं, जिनकी फैक्ट्रियों के अलावा ग्रोसरी स्टोर और खुद के हेलीकॉप्टर हैं। हरपाल सिंह संधू स्वीट, समोसा फैक्टरी के संचालक हैं, जिनका समोसा तैयार होकर पूरे कनाडा और अमेरिका तक जाता है। कनाडा के टोरंटो में उनका नाम पहली कतार में लिया जाता है। 
विकास खन्ना जाने माने शेफ व रेस्तरां मालिक, मंजीत सिंह टीवी कलाकार, जबकि रूपनी सिंह उद्योगपति हैं। वह वहां मोम का म्यूजियम बना रही हैं। पंजाबी फिल्मों की अभिनेत्री नीरू बाजवा व तरुणपाल भी यहीं से हैं। उपन्यास लेखक गुरजिंदर, रानी धारीवाल व कॉमेडियन लिली सिंह भी जाने-माने कलाकार हैं। कनाडा की संसद व विधानसभा में भी सिख सदस्य हैं। हरजीत सिंह सज्जन तो वहां के रक्षा मंत्री तक रह चुके हैं। खेलों के क्षेत्र में वहां के खिलाड़ियों का अहम स्थान है। इनमें नवराज सिंह बस्सी से लेकर खैरा सिंह भुल्लर शामिल हैं। कनाडा में चार बार सांसद बने नवदीप बैंस इनोवेशन, साइंस एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट मिनिस्टर रह चुके हैं। टिम उप्पल व अमरजीत सोही भी मंत्री रह चुके हैं। बर्दिश चग्गर मौजूदा मंत्री हैं। बीसी में पंजाबी मूल की रचना सिंह, मिसिसागा से नीना तांगड़ी भी मंत्री हैं।
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मेजर केसर सिंह कनाडा में शिफ्ट होने वाले पहले सिख थे
1897 में महारानी विक्टोरिया ने ब्रिटिश भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी को डायमंड जुबली सेलिब्रेशन में शामिल होने के लिए लंदन आमंत्रित किया था। तब घुड़सवार सैनिकों का एक दल भारत की महारानी के साथ ब्रिटिश कोलंबिया के रास्ते में था। जिनकी अगुवाई करने वाले थे, रिसालदार मेजर केसर सिंह। वह कनाडा में शिफ्ट होने वाले पहले सिख थे। सिंह के साथ कुछ और सैनिकों ने कनाडा में रहने का फैसला किया था। इन्होंने ब्रिटिश कोलंबिया को अपना घर बनाया। भारत से सिखों के कनाडा जाने का सिलसिला यहीं से शुरू हुआ था। जिन्होंने कनाडा की सियासत से लेकर कारोबार तक में अपना डंका बजाया।

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