एक दो वर्षीय बच्चे और श्रीपाल के लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट आ गई है। जीएमएसएच-16 के अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली लैब से अधिकारियों ने फोन पर बात की थी। फोन पर उन्हें बताया गया है कि दोनों ही रिपोर्ट निगेटिव है। श्रीपाल वाइल्ड लाइफ का कर्मचारी है। उसे पंचकूला के हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था।
अधिकारियों का कहना है कि सैंपल उन्हीं के लिए हैं, जो बर्ड फ्लू कंफर्म होने से दस दिन पहले सुखना लेक गए थे। मंगलवार को कोई भी संदिग्ध पेशेंट नहीं आया और न ही किसी कोई सैंपल भेजा गया।
सुखना लेक के पानी, माइग्रेंट बर्ड्स व पोल्ट्री फार्म के सैंपल लेने के लिए भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज की टीम मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंची। टीम के सदस्यों ने सबसे पहले सुखना के आसपास पड़ने वाले पोल्ट्री फार्म के सैंपल भरे। तीन पोल्ट्री फार्म से कुल 22 सैंपल लिए गए हैं।
भोपाल से आई टीम के साथ जालंधर लैब के अधिकारी भी थे। रात हो जाने के कारण वे सुखना के सैंपल नहीं ले पाए। बुधवार सुबह वे सुखना के पानी व माइग्रेंट बर्ड्स के सैंपल लेंगे। सैंपल रिपोर्ट तीन से चार दिन बाद आने की संभावना है। उसके बाद अगला कदम उठाया जाएगा।
लेक क्लब के सदस्यों की जांच हुई
जीएमएसएच-16 में मंगलवार को लेक क्लब के 55 सदस्यों की जांच की गई। बर्ड फ्लू कंफर्म होने के बाद लेक के सदस्य काफी घबराए हुए थे। जांच में सभी सदस्य स्वस्थ्य निकले।
सुखना लेक के तीन किलोमीटर में एरिया में चल रहे डोर टू डोर सर्वे के दौरान 6400 घरों को अब तक कवर कर लिया गया है। सर्वे में फिलहाल अब तक कोई भी संदिग्ध पेशेंट नहीं मिला है।
डॉक्टरों को दी गई ट्रेनिंग
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की टीम के सदस्यों ने मंगलवार को चंडीगढ़ के डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें बताया गया कि यदि कोई संदिग्ध पेशेंट आ जाता है तो उसका इलाज कैसे किया जाना है। पेशेंट का सैंपल किस चीज का लेना और किस तरीके से लेना है। इस बारे में विस्तार से डाक्टरों को बताया गया।
एक बर्ड पर अब भी संशय बरकरार
सुखना लेक पर एक बर्ड्स पर अब भी संशय बरकरार है। लेक पर अक्सर एक बतख तैरती हुई दिख जाती है। कभी आइसलैंड पर तो कभी जागिंग ट्रैक पर। पहले अधिकारियों ने कहा कि यह बतख उसी प्रजाति की है, जिन्हें आइलैंड पर दफनाया गया है।
एक मीटिंग में उसे मारने के आदेश भी जारी कर दिए गए थे, लेकिन बाद में वाइल्ड लाइफ की तरफ से बयान दिया गया है कि वह जंगली बतख है। डोमेस्टिक नहीं है। यदि डोमेस्टिक होती तो अब तक मर चुकी होती।
इसके बावजूद मंगलवार को वाइल्ड लाइफ के कर्मचारी उसे ढूढ़ने के लिए सुखना की खाक छानते रहे। करीब ढाई घंटे तक उन्हें सुखना लेक का निरीक्षण किया। बाद में पता चला कि वह बोट के पीछे छिपी हुई थी। फिलहाल अब तक कोई भी अधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।