चंडीगढ़ में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद उत्तर भारत के सभी राज्यों को सचेत कर दिया गया है। शुक्रवार को जालंधर के सर्किट हाउस में रीजनल एनिमल डिजीज डायग्नोस्टिक लैब से संबंधित उत्तर भारत के तमाम राज्यों के नोडल अफसरों की बैठक हुई। इसमें बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार के एक्शन प्लान के तहत नए निर्देश जारी कर सतर्कता बरतने को कहा गया है।
इसके तहत चंडीगढ़ में सुखना झील की तर्ज पर पंजाब की हरीके पत्तन बर्ड सेंचुरी समेत जम्मू कश्मीर, राजस्थान और अन्य राज्यों की झीलों में बसने वाले पंछियों के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं।
पोल्ट्री फार्म, बैक यार्ड पोल्ट्री के अलावा लाइव बर्ड मार्केट में भी सैंपल लेने को कहा गया है। साथ ही मार्केट के एनवायर्नमेंट की सैंपलिंग भी की जाएगी। इसकी पुष्टि पशु पालन विभाग पंजाब के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. विजय मोहन ने की है।
नोडल अफसरों की बैठक में निर्देश
शुक्रवार को पंजाब के अलावा हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, दिल्ली के नोडल अफसरों की बैठक में चंडीगढ़ में बर्ड फ्लू के बाद की स्थिति पर खास तौर पर विचार किया गया। बैठक में निर्देश दिया गया है कि झीलों में पल रहे पंछियों की बीट के सैंपल भी लिए जाएं।
साथ ही बर्ड सेंचुरीज में दूसरे देशों से आने वाले प्रवासी पंछियों के रक्त के सैंपल वाइल्ड लाइफ सोसाइटीज की मदद से लेने को भी कहा गया है। यह भी सचेत किया गया है कि यदि बर्ड फ्लू का कोई केस सामने आता है तो इसकी तुरंत सूचना विभाग एवं डायग्नोस्टिक लैब को दी जाए।
पोल्ट्री फार्मर को भी यह सुझाव दिया गया है कि वे मुर्गियों की बीट के ढेर फार्म से दूर लगाएं। पोल्ट्री फार्म में जंगली पंछियों को आने से रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। अंडे, फीड इत्यादि के ट्रकों को भी बार बार डिस-इंफे क्टेड किया जाए। लाइव बर्ड मार्केट में मुर्गियों और अन्य पंछियों की बीट के अलावा उनके पिंजरों इत्यादि से भी सैंपल लेकर जांच की जाएगी।
डॉ. विनय मोहन ने कहा कि फिलहाल किसी भी तरह के पेनिक की जरूरत नहीं है, सभी कारगर उपाय किए जा रहे हैं। बैठक में बर्ड फ्लू के अलावा पशु पंछियों में होने वाली अन्य बीमारियों के बारे में भी मंथन करके उनके बारे में आवश्यक निर्देश जारी किए गए।