अरुण जेटली से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह
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आर्थिक तंगी से जूझ रही पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के लिए केंद्र जल्द ही बड़ी राहत की घोषणा कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) के 31000 करोड़ रुपये में शामिल 18500 करोड़ रुपये की ब्याज राशि राशि को माफ करने को केंद्र सरकार तैयार हो गई है। यह फैसला वीरवार को नई दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली के साथ मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर और पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल की बैठक के दौरान लिया गया है।
माना जा रहा है कि पंजाब के आर्थिक बोझ पर केंद्र के रुख में आई इस नरमी का मुख्य कारण, इस साल पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की गई मुलाकात है। मोदी ने तब कैप्टन की बात सुनने के बाद उन्हें वित्त मंत्री जेटली से मिलने को कहा था। वीरवार को कैप्टन ने जेटली से कैश सीसीएल को लेकर पंजाब पर चढ़े कर्ज के बारे में बातचीत की और इसे निपटाने के लिए मदद का अनुरोध किया। उन्होंने जेटली को बताया कि सीसीएल के 31000 करोड़ रुपये में 12500 करोड़ की मूल रकम है और 18500 करोड़ रुपये की ब्याज राशि है।
कैप्टन ने जेटली को यह भी बताया कि पंजाब सरकार की माली हालत बहुत ज्यादा खस्ता है और जनकल्याण की योजनाओं को लागू करने तक के लिए सरकार को कई बार सोचना पड़ रहा है। सीसीएल के 31000 करोड़ रुपये चुकाने के लिए पंजाब को अगले 20 साल तक 270 करोड़ रुपये प्रति माह कर्जदाता बैंकों को देने होंगे। कैप्टन ने अनाज खरीद पर राज्य को होने वाली हानि का मुद्दा भी उठाया और कहा कि राज्य हर वर्ष लगभग 44000 करोड़ रुपये की अनाज खरीद करता है तथा इस पर उसे लगभग 5500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
सीसीएल पर ब्याज के शिकंजे में ऐसे फंसी सरकार
अरुण जेटली से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह
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सीसीएल पर ब्याज के शिकंजे में ऐसे फंसी सरकार
दरअसल यह सारा मामला पंजाब में केंद्रीय एजेंसी एफसीआई द्वारा अनाज खरीद से जुड़ा है। एफसीआई के लिए हर साल पंजाब सरकार किसानों से फसल खरीदती है। इसके लिए किसानों को अनाज की एमएसपी के अनुसार जो पैसा दिया जाता है, पंजाब सरकार को उसका भुगतान एफसीआई द्वारा किया जाता है।
इस भुगतान में अनाज की ढुलाई, परिवहन, स्टोरेज आदि विभिन्न मदों में खर्च होने वाली राशि भी शामिल होती है। राज्य सरकार किसानों से अनाज खरीदने के बाद और एफसीआई के सुपुर्द करने से पहले चार महीने की अवधि तक इस अनाज का रखरखाव भी करती है। एफसीआई से जब तक इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता, राज्य सरकार बैंकों से कर्ज लेकर किसानों को उनका मेहनताना चुका देती है।
पंजाब में बीते दस साल के दौरान यही सिलसिला चला लेकिन अनेक बार एफसीआई ने पंजाब में अनाज की ढुलाई, स्टोरेज के खर्च को ज्यादा बताते हुए भुगतान में कटौती की। इसी कटौती के कारण पंजाब सरकार के 12500 करोड़ रुपये फंस गए और उसके लिए बैंकों से हासिल के कर्ज पर ब्याज की राशि बढ़कर 18500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।