पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी व उनके पारिवारिक सदस्यों को दोहरे वोट के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। जस्टिस कुलदीप सिंह की एकल बेंच ने जिला अदालत के वह समन रद्द कर दिए हैं, जिसमें जोशी व उनके पारिवारिक सदस्यों को दोहरे वोट की शिकायत में जवाब मांगा गया था।
हाईकोर्ट ने कहा है कि दोहरा वोट कोई अपराध नहीं है और जनप्रतिनिधि एक्ट में दोहरे वोट होने पर तब तक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, जिब तक यह वोट झूठी जानकारी देकर न बनाया गया हो। बेंच ने कहा है कि जनप्रतिनिधि एक्ट के तहत जोशी को सम्मन जारी ही नहीं किया जा सकता।
बेंच ने यह भी कहा है कि चुनाव आयोग को दोहरे वोट की शिकायत आठ साल देरी से की गई। अमूमन देरी से की शिकायत के लिए भरपाई करनी होती है और इसके लिए नोटिस देना जरूरी है, लेकिन भरपाई का नोटिस दिए बगैर शिकायत की गई, लिहाजा यह शिकायत भी स्टैंड नहीं करती।
उल्लेखनीय है कि जोशी व उनके परिवारिक सदस्यों के खिलाफ चुनाव आयुक्त को शिकायत देकर आरोप लगाया गया था कि जोशी की तरनतारन और अमृतसर दोनों जगह वोट है। इस दलील के साथ इसे जनप्रतिनिधि कानून का उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।
चुनाव आयुक्त ने अमृतसर प्रशासन से जांच कराई और बाद में जोशी के खिलाफ जनप्रतिनिधि एक्ट के तहत मामला शुरू हुआ था और वहां की जिला अदालत ने जोशी व उनके पारिवारिक सदस्यों को सम्मन जारी करके पेश होने और जवाब देने को कहा था।