12 मार्च को ही हरियाणा सरकार को समर्थन पत्र दे चुके थे निर्दलीय, सदन में भी किया था समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनावों से पहले किए गए मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा की रणनीति के आगे निर्दलीय विधायक और जजपा के पांच बागी विधायक गच्चा खा गए। भाजपा ने ऐन वक्त पर अपनी रणनीति बदल दी और मंत्री पद की आस लगाए बैठे इन विधायकों को झटका देते हुए मंत्रिमंडल में अपने पुराने काडर के नेताओं को तव्वजो दी। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि हरियाणा सरकार विधानसभा में पहले ही फ्लोर टेस्ट में पास हो चुकी है और आगामी छह माह तक सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला जा सकता। इसलिए अब निर्दलीय और पांचों बागी विधायकों की नाराजगी से सरकार को कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं, जजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद से सोशल मीडिया पर छाए भुंडी बणगी डायलॉग को अब निर्दलीयों और जजपा के पांचों विधायकों से जोड़ा जा रहा है और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है...बहुत भुंडी बणगी..। जजपा से गठबंधन तोड़ने से पहले 12 मार्च को पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सभी निर्दलीयों को अपने आवास पर बुलाकर समर्थन पत्र लिया था। उस समय यह तय माना जा रहा था कि निर्दलीयों के सहारे चलने वाली सरकार में निर्दलीय विधायकों को मंत्री बनाया गया जाएगा। इसके बाद, आनन फानन में विशेष सत्र बुलाकर सरकार फ्लोर टेस्ट करवा चुकी है और इसमें निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन दिया था। अब मंगलवार को हुए विस्तार के दौरान भी रणधीर गोलन और नयनपाल रावत को नाम मंत्री बनाने की अटकलें चलती रही, लेकिन किसी भी निर्दलीय को मौका नहीं दिया गया।
रणजीत सिंह शेष निर्दलीयों पर पड़े भारी
7 निर्दलीय विधायकों में से केवल रणजीत सिंह चौटाला केबिनेट में शामिल हैं। मनोहर और सैनी दोनों की सरकारों में रणजीत सिंह शेष सभी छह निर्दलीयों पर भारी पड़े हैं। मनोहर लाल की तरह नायब सैनी ने भी निर्दलीय कोटे से चौधरी रणजीत सिंह पर ही विश्वास जताया है। लंबे समय तक कांग्रेस में रहे रणजीत सिंह रानियां से विधायक हैं और भाजपा का गुणगान करते रहे हैं।
केवल चेयरमैन की कुर्सी ही मिल पाई
महम से निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू को छोड़कर शेष पांच निर्दलीय विधायकों को हरियाणा सरकार में केवल चेयरमैन की कुर्सी ही मिल पाई है। इनमें से अधिकतर ऐसे हैं जिनका बतौर चेयरमैन कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार ने दोबारा एक्सटेंशन नहीं दी। इनमें पृथला के विधायक नयनपाल रावत को वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन, पुंडरी विधायक रणधीर गोलन पर्यटन विकास निगम और पशुधन विकास निगम में चेयरमैन रह चुके हैं। दादरी से विधायक सोमबीर सांगवान को पशुधन विकास बोर्ड का चेयरमैन लगाया गया था, लेकिन किसान आंदोलन में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई। बादशाहपुर के विधायक राकेश दौलताबाद को हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज और नीलोखेड़ी से निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर वन विकास निगम का चेयरमैन रहे हैं।
निर्दलीयों और जजपा को इसलिए मौका नहीं
पहले भाजपा निर्दलीयों और जजपा विधायकों के साथ सरकार बनाना चाहती थी, लेकिन बाद में भाजपा ने अपनी रणनीति बदली। जजपा के विधायकों को तोड़ने से नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका के चलते यह प्लान छोड़ दिया। इसी प्रकार, सभी निर्दलीयों को मंत्री बनाना संभव नहीं था, इसलिए यह प्लान भी छोड़ दिया। चाहकर ही निर्दलीय विधायक सरकार पर असर नहीं डाल सकेंगे।