आठ व नौ सितंबर वर्ष 1928 में दिल्ली के किला फिरोशाह कोटला में हुई क्रांतिकारियों की बैठक में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के केश और दाढ़ी काटने का फैसला लिया गया था। इसलिए फिरोजपुर शहर स्थित तूड़ी बाजार (मोहल्ला शाहगंज) के गुप्त ठिकाने पर भगत सिंह के केश और दाढ़ी काटी गई थी। यही नहीं उक्त बैठक में क्रांतिकारियों ने तीन महत्वपूर्ण फैसले लिए थे। इसमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान के क्रांतिकारियों ने हिस्सा लिया था।
लेखक राकेश कुमार ने बताया कि बैठक में तीन महत्वपूर्ण फैसले लिए गए थे। बैठक में फैसला लिया गया था कि क्रांतिकारियों के पास धनराशि की कमी है इसलिए क्रांतिकारी फनिंदर घोस के सुझाव के अनुसार बिहार में डकैती की जाएगी। यही नहीं भगत सिंह और चंद्र शेखर आजाद को सितंबर के आखिर में फनिंदर घोस के पास पहुंचने के लिए कहा गया था। भगत सिंह के वहां जाने की सलाह पर चर्चा करते समय महसूस किया गया कि अगर वह वहां सिखी स्वरूप में जाएंगे तो पहचाने जाएंगे। इसलिए वह केस और दाढ़ी कटवा लें।
फनिंदर ने मूंछे रखने का सुझाव दिया क्योंकि बिहार में मूंछे कटवाने का रिवाज नहीं था। इसलिए वर्ष 1928 सितंबर के मध्य में भगत सिंह व सुखदेव फिरोजपुर पहुंचे और दिल्ली में हुई बैठक के अनुसार फिरोजपुर शहर स्थित तूड़ी बाजार में बने गुप्त ठिकाने में केश व दाढ़ी काट ली। ज्ञात हो कि क्रांतिकारी जय गोपाल ने अदालत में अपने बयान में कहा था कि सुखदेव के आने पर क्रांतिकारी डा. निगम और सुखदेव ने भगत सिंह के केश-दाढ़ी काटी थी।
लेखक ने बताया कि दिल्ली में हुई बैठक में पंजाब से भगत सिंह व सुखदेव, यूपी से शिव वर्मा, जयदेव व विजय कुमार सिन्हा, बिहार से फनिंदर घोस और राजस्थान की तरफ से कुंदन लाल हाजिर हुए थे।
बैठक में लिए गए तीन महत्वपूर्ण फैसले
1. काकोरी केस के बंदी योगेश चटर्जी को जेल बदली के समय मुक्त करवाना।
2. भगत सिंह के साइमन कमीशन के विरुद्ध कार्रवाई सुझाने पर महसूस किया गया कि बम जरूरी है। तब कोलकाता में फनिंदर घोस की ओर से किसी बम माहिर की सेवाएं लेने का फैसला लिया गया।
3. भगत सिंह के केश और दाढ़ी कटवाने का फैसला लिया गया।