राज्य में बेअदबी मामलों की जांच करने वाले न्यायिक आयोग के प्रमुख जस्टिस रणजीत सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित बहिबल गोलीकांड केस के मुख्य गवाह सुरजीत सिंह की मौत के मामले में उस पर गवाही से मुकरने का दबाव डालने वाले आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की है।
साथ ही आयोग ने खुलासा किया है कि गवाही से मुकरने का दबाव होने पर सुरजीत सिंह ने उनसे संपर्क साधा था और उन्होंने एसएसपी फरीदकोट समेत पावरकॉम विभाग के अधिकारियों को हिदायतें भी दी थीं, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई। आयोग ने सुरजीत सिंह की मौत से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड केस के सभी गवाहों की सुरक्षा यकीनी बनाने का भी आह्वान किया है।
सुरजीत ने न्यायिक आयोग से भी संपर्क साधा था
जानकारी के अनुसार, बहिबल गोलीकांड केस के मुख्य गवाह सुरजीत सिंह की पिछले माह 15 जनवरी को हार्ट अटैक के कारण मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद उनके परिवार ने खुलासा किया है कि सुरजीत सिंह पर गवाही मुकरने का दबाव बनाया जा रहा था और दबाव बनाने वाले उनके गांव के तीन व्यक्तियों, पुलिस व पावरकाम अधिकारियों को कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ और फरीदकोट से विधायक कुशलदीप सिंह ढिल्लों की शह मिली हुई थी।
इस मामले को लेकर चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच अब जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सुरजीत सिंह के मामले में अहम खुलासा किया है कि वह पिछले लंबे समय से ही गवाही को लेकर दबाव में चल रहा था। सूत्रों के अनुसार जस्टिस रणजीत सिंह ने इस पत्र में बहिबल गोलीकांड केस के मुख्य गवाह के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं।
जस्टिस रणजीत सिंह के अनुसार उन्हें स्व. सुरजीत सिंह की पत्नी ने फोन पर जानकारी दी है कि उनके परिवार पर गवाही मुकरने के लिए दबाव बनाया जा रहा था जिसके लिए उन्हें कुछ व्यक्तियों समेत पुलिस व अन्य सरकारी विभागों के द्वारा तंग परेशान किया जा रहा था। इसी वजह से सुरजीत सिंह तनाव में था और हार्ट अटैक के कारण उसकी मौत हो गई।
सुरजीत को हाईकोर्ट में याचिका दायर करने को कहा गया था
अपने पत्र में जस्टिस रणजीत सिंह ने लिखा है कि इससे पहले खुद सुरजीत सिंह ने भी उनके साथ संपर्क करके इन हालात की जानकारी दी थी, जिस आधार पर उन्होंने एसएसपी फरीदकोट व पावरकॉम को हिदायतें भी दी थी, लेकिन इसके बावजूद उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई जिसके बाद उन्होंने सुरजीत सिंह को हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की सलाह दी थी और याचिका दायर करने के लिए उसे एक वकील भी उपलब्ध करवा दिया था लेकिन इसी बीच उसकी मौत हो गई।
जस्टिस रणजीत सिंह ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि बहिबल गोलीकांड केस में सुरजीत सिंह एक अहम व प्रत्यक्षदर्शी गवाह था और आयोग के पास ब्यान दर्ज करवाने के समय से ही उस पर दबाव था। आयोग के पास भी उसने गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद ब्यान दर्ज करवाया था और आयोग को जानकारी दी थी कि जब उसने जस्टिस जोरा सिंह आयोग के पास गवाही दर्ज करवाई थी, उस समय भी उसे पुलिस अधिकारियों समेत कई व्यक्तियों ने डराया धमकाया था और इसी वजह से वह जस्टिस रणजीत सिंह के पास ब्यान देने से कतरा रहा था।
हालांकि उस समय आयोग ने राज्य सरकार, डीजीपी पंजाब व एसएसपी फरीदकोट को हिदायतें जारी की थीं कि वह गवाहों की सुरक्षा यकीनी बनाएं, लेकिन सुरजीत सिंह जैसे अहम गवाह के मामले में कोताही सामने आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सुरजीत सिंह को गवाही देने पर डराने धमकाने वाले लोगों समेत सम्बंधित पुलिस व पावरकाम अधिकारियों पर कार्यवाही करने के साथ साथ अन्य गवाहों की सुरक्षा यकीनी बनाने का आह्वान किया है।
धमकाने के लिए हवाई फायरिंग, कांग्रेस नेताओं की जमानत याचिका खारिज
थाना बाजाखाना पुलिस ने बहिबल गोलीकांड केस के मुख्य गवाह सुरजीत सिंह की पत्नी जसवीर कौर के बयान पर उनके परिवार को डराने धमकाने की मंशा से हवाई फायरिंग करने के आरोप में गांव बहिबल कलां के कांग्रेस नेता मनजिंदर सिंह, उसके भाई जगदीप सिंह व एक अन्य लवप्रीत सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था। केस दर्ज होने के बाद इनमें से दो आरोपियों जगदीप सिंह व लवप्रीत सिंह ने जिला अदालत के पास अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिस पर सोमवार को अतिरिक्त जिला व सेशन जज की अदालत में सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद जिला अदालत ने दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। जानकारी के अनुसार, इस केस में कांग्रेस नेता मनजिंदर सिंह, जगदीप सिंह व लवप्रीत सिंह पर आरोप है कि 2018 के दौरान सुरजीत सिंह के घर के ऊपर से हाई वोल्टेज सप्लाई लाइन निकालने व ट्रांसफार्मर रखने को लेकर उनकी सुरजीत सिंह के परिवार के साथ कहासुनी हुई थी और इसके बाद पिछले साल ही 15 नवंबर और 18 दिसंबर को मनजिंदर सिंह ने सुरजीत सिंह के परिवार को डराने की मंशा से अपने घर हवाई फायर किए थे, जिस संबंध में घटना के समय पुलिस के पास शिकायत देने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
अब सुरजीत सिंह की मौत के बाद मचे बवाल के बाद पुलिस ने जसवीर कौर की शिकायत पर तीनों के खिलाफ केस दर्ज किया। याचिकाओं पर बहस के दौरान शिकायतकर्ता जसवीर कौर के वकील अमित मित्तल ने जिला अदालत को अवगत कराया कि यह केस महज हवाई फायरिंग का नहीं है, बल्कि बहिबल कलां गोलीकांड के मुख्य गवाह सुरजीत सिंह पर गवाही मुकरने के दबाव बनाए जाने का है, जिसमें कई रानेता, पुलिस व पावरकाम के अधिकारी भी शामिल हैं। अदालत ने उनकी दलीलों पर सहमति जताते हुए आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।