पंजाब विधानसभा चुनाव को अभी आठ माह से ज्यादा के समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक दलों के कार्यालयों में एकाएक गहमागहमी बढ़ गई है। सभी दलों ने अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कवायद शुरू कर दी है।
चंडीगढ़ स्थित विभिन्न तमाम राजनीतिक दलों के कार्यालयों में रौनक छा गई है। भाजपा ने अपने चारों मंत्रियों और प्रदेश प्रधान को चंडीगढ़ कार्यालय में बैठकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की शिकायतें सुनने के अलावा उनके काम करवाने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों के पहुंचते ही भाजपा कार्यालय में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। अब यह मंत्री प्रत्येक सप्ताह बुधवार को कार्यालय में बैठकर लोगों के काम करेंगे, ताकि चुनाव से पहले लोगों के बीच पैठ बनाई जा सके। लोगों का कहना है कि काश भाजपा ने यह कवायद पहले से शुरू की होती तो आज कार्यकर्ताओं में भी भारी उत्साह होता।
कुछ ऐसा ही हाल चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन का है। प्रदेश प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह के लगातार पहुंचने और पदाधिकारियोें के साथ बैठक करने पर कांग्रेसियों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है।
अकसर महलों में समय बिताने वाले कैप्टन इन दिनों कड़ी गर्मी के बावजूद कार्यालय में पहुंच कार्यकर्ताओं में एकबार फिर जान फूंकने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कैप्टन कांग्रेस के विभिन्न गुटों में आपसी समन्वय बनाने की भी भरपूर कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में भला अकाली कहां पीछे रहने वाले थे। शिअद प्रधान और उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने दो दिन पहले पार्टी के तमाम विंगों की बैठक चंडीगढ़ कार्यालय में बुलाई और उन्हें चुनाव के लिए सक्रिय हो जाने को कहा। उन्होंने पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि चुनाव से पहले सब कुछ भूल पूरी ताकत झोंक दी जाए।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को कहा कि अगली सरकार फिर शिअद-भाजपा गठबंधन की बनेगी। इन सबके बीच पंजाब के सियासी अखाड़े में पहली बार उतरने वाली आम आदमी पार्टी (आप) लगातार अकाली दल, भाजपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लेने में कोई मौका नहीं गंवा रही है।