चंडीगढ़। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रधान विकास मलिक और सचिव स्वर्ण सिंह पर भ्रष्टाचार व अन्य आरोपों को लेकर बार काउंसिल ऑफ पंजाब-हरियाणा से मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) तक पहुंचने पर हाईकोर्ट ने संतुष्टि जताते हुए जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को इस मामले का दो माह के भीतर निपटारा करने का आदेश दिया है।
बार एसोसिएशन के प्रधान विकास मलिक व महासचिव स्वर्ण सिंह के खिलाफ बार के फंड के दुरुपयोग को लेकर याचिका दाखिल की गई थी। इस मामले में याची नोटिस सर्व करवाने के लिए प्रधान कार्यालय में गए थे और कथित तौर पर विकास मलिक व अन्य ने याची वकीलों से हाथापाई व मारपीट की। इसे लेकर 1 जुलाई को एफआईआर भी दर्ज की गई थी। मामला दोबारा सुनवाई के लिए पहुंचा तो हाईकोर्ट ने इसे बहुत गंभीरता से लेते हुए एफआईआर की निगरानी करने का चंडीगढ़ के एसएसपी को आदेश दिया था। यह भी निर्देश दिया था कि आवश्यक अन्य धाराएं भी एफआईआर में जोड़ी जाएं। फंड के दुरुपयोग के मामले का हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा को जल्द से जल्द निपटारे का आदेश दिया था। बार काउंसिल ने प्रधान व सचिव दोनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनका लाइसेंस निलंबित कर दिया था। इस मामले में दोनों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की शरण ली थी, जहां दोनों को अंतरिम राहत देते हुए बीसीआई ने राज्य बार काउंसिल के आदेश पर रोक लगाते हुए आगे सुनवाई न करने का आदेश दिया था। जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई तो हाईकोर्ट को मामला बीसीआई के पास पहुंचने की जानकारी दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि हमें उम्मीद है कि बीसीआई इस मामले का दो माह के भीतर निपटारा कर देगी। ऐसा करते हुए इस बात का ध्यान रखा जाए कि सौहार्द का माहौल खराब न हो। इसके साथ वकीलों से भी अनुरोध किया कि यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा न हो।