जैसे ही बरोदा में कांग्रेस जीत का परचम लहराएगी तो सरकार की बैसाखी बने इन विधायकों की बगावत भी खुलकर सामने आएगी। सरकार के सहयोगी विधायकों के दिल में असंतोष की जो आग सुलग रही है वो उपचुनाव के बाद ज्वाला का रूप धारण कर लेगी और ये सरकार अपनों के असंतोष के बोझ से गिर जाएगी।
जिस तरह से सरकार ने किसानों पर कृषि कानून थोपे हैं, उससे गठबंधन के नेताओं और मंत्रियों का जनता के बीच में जाना मुश्किल हो गया है। हर जगह उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है। माहौल को भांपते हुए सरकार के अधिकतर नेता तो बरोदा में चुनाव प्रचार बीच में ही छोड़कर भाग गए हैं।
नए कर्मचारी भर्ती करने के बजाय सरकार पुराने और कच्चे कर्मचारियों की छंटनी करने में लगी है। एक लाख एचटेट पास जेबीटी भर्ती के इंतजार में ओवर एज होते जा रहे हैं। ना कोई सरकारी भर्ती निकल रही है और न ही प्राइवेट रोजगार उत्पन्न हो रहे हैं। क्योंकि प्रदेश में किसी तरह का नया निवेश नहीं हो रहा है। यही वजह है कि हरियाणा में बेरोजगारी अपने चरम पर है। हरियाणा का युवा देश में सबसे अधिक बेरोजगारी दर झेल रहा है।