पंजाबी सूफी गायक बरकत सिद्धू की अंतिम अरदास रविवार को स्थानीय गुरुद्वारा बीबी काहन कौर में आयोजित की गई। सिद्धू का 16 अगस्त को देहांत हो गया था। वह कैंसर से पीड़ित थे। इस दौरान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की तरफ से भेजा गया शोक संदेश पढ़ कर सुनाया गया। इससे पहले कैबिनेट मंत्री जत्थेदार तोता सिंह ने पारिवारिक सदस्यों से दुख जताया।
इस दौरान सूफी गायक हंसराज हंस ने कहा कि बरकत सिद्धू पंजाबी के अजीम गायक ही नहीं बल्कि सभी ही कलाकार भाईचारों के उस्ताद भी थे। उन्होंने कहा कि यदि आज म्यूजिक इंडस्ट्री में बरकत है तो वह सारी बरकत सिद्धू के कारण ही है। उन्होंने कहा कि वह सही अर्थों में फकीर और दरवेश थे, जिन्होंने सारी उम्र संगीत और गायकी को समर्पित की। वह गाते भी संगीत में थे और बातचीत भी संगीत में करते थे।
शिरोमणि अकाली दल के उप प्रधान निधड़क सिंह बराड़ ने कहा कि बरकत सिद्धू केवल पंजाब का ही नहीं बल्कि देश का मान थे। उन्होंने कहा कि सिद्धू ने सूफी गायकी के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग मरते नहीं, मन में हमेशा जीते रहते हैं। प्रसिद्ध गायक पूर्ण शाहकोटी, पूर्ण चंद वडाली और प्यारे लाल वडाली ने कहा कि सिद्धू संगीत के प्रेमियों के लिए एक पैगंबर थे।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि मातृभाषा की सेवा करने वाले सिद्धू को पद्मश्री अवार्ड दिया जाए। साथ ही उनकी उचित यादगार, संगीत अकादमी या उनका आदमकद बुत स्थापित किए जाने के अलावा किसी शैक्षणिक संस्था का नाम बरकत सिद्धू के नाम पर रखे जाने की भी मांग की गई। इस मौके पर विधायक बीबी राजविंदर कौर भागीके, पूर्व मंत्री डॉ. मालती थापर, रनविंदर सिंह पप्पू रामूंवाला, तरसेम सिंह तलवंडी भाई, अक्षित जैन, प्रिंसिपल सुखवंत सिंह लुधियाना, प्यारे लाल पल्स मंच, डॉ. तारा सिंह संधू, इंजीनियर प्यारा सिंह चाहल, अमर सूफी, इंद्रजीत सिंह तलवंडी भंगेरिया और सूरत सिंह धर्मकोट मौजूद थे।