सरकारी बैंकों की देशव्यापी हड़ताल के कारण सभी सरकारी बैंक बंद रहे, जिससे आम लोगों के अलावा उद्यमियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी।
पंचकूला की शाखाओं से रोजाना करीब 15-18 करोड़ का लेनदेन होता है, जिनमें पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया से औसतन रोजाना 4-5 करोड़ का कारोबार होता है।
अभी कर्मियों को वेतन देने का भी समय है। ऐसे में बैंक हड़ताल से इसमें भी अड़ंगा लगा। हालांकि, शहर के एटीएम सुचारु रूप से चलते रहे।
उद्यमियों का कहना था कि बैंकों में शनिवार को हाफ डे और रविवार को छुट्टी। इसके बाद सोमवार को हड़ताल रही। मंगलवार को भी यह हड़ताल जारी रहेगी।
इससे सबसे ज्यादा कारोबारियों और उद्यमियों को दिक्कतें हो रही हैं। कम से कम शनिवार-रविवार की छुट्टी के तत्काल बाद हड़ताल नहीं करनी चाहिए।
बैंककर्मियों का प्रदर्शन
एसबीआई कर्मियों ने सेक्टर-10 स्थित शाखा के बाहर विरोध दर्ज कराते हुए अपने वेतन में संशोधन की मांग दोहराई।
एसोसिएशन के प्रधान संजय सूद और ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदीप गुप्ता ने कहा कि नवंबर 2012 से वेतनमान में बढ़ोतरी नहीं की गई, जिसके विरोध में हड़ताल की जा रही है।
ग्राहकों को दिक्कत न हो, इसलिए एटीएम में अधिक कैश लोड करा दिए गए हैं।
हड़ताल के पहले दिन लोगों को 5-10 फीसदी परेशानियां झेलनी पड़ी। दूसरे दिन यह असर 25 फीसदी तक हो सकता है। केवल इंडस्ट्रियल एरिया से ही पहले-दूसरे सप्ताह में 4-5 करोड़ का ट्रांजेक्शन होता है।
कई फैक्ट्रियों और कंपनियों में कर्मियों को तनख्वाह देने में भी दिक्कतें हुईं।
सीबी गोयल
हड़ताल के कारण सभी वर्ग के लोगों को दिक्कतों हुईं। सरकार को एस्मा कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए या बैंकों में वैकल्पिक इंतजाम करना चाहिए।
रविन्द्र रावल
हड़ताल के कारण लोगों को फीस, जमीन की रजिस्ट्री या पार्टियों को भुगतान करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा। एक तरफ बैंकिंग क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की होड़ लगी है तो दूसरी तरफ ग्राहकों को परेशान किया जा रहा है।
प्रवीण आत्रेय