चंडीगढ़। पीजीआई में असिस्टेंट प्रोफेसर के 124 पदों पर होने वाली नियुक्ति फिलहाल रोक दी गई है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को दिए गए निर्देश के बाद पीजीआई में सहायक प्रोफेसरों के 124 पदों पर भर्ती प्रक्रिया खतरे में पड़ गई है। आयोग और एससी/एसटी कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सदस्यों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद मंत्रालय को यह कदम उठाना पड़ा। पीजीआई के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोग के समक्ष पेश होकर इन परिस्थितियों में पदों के विज्ञापन के बारे में स्पष्टीकरण भी दिया है।
पीजीआई में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति 2020 से लंबित है। ऐसी स्थिति में लगातार नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया बाधित होने से संस्थान में शैक्षणिक व्यवस्था के साथ ही अन्य प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं क्योंकि असिस्टेंट प्रोफेसर जहां शैक्षणिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, वहीं ओपीडी से लेकर संस्थान में संचालित विभिन्न योजनाओं में भी इनका अहम रोल होता है। ऐसे में उनकी कमी के कारण पीजीआई को व्यवस्था सुचारू रूप से चलने में काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार नियुक्ति मामले में आरोप है कि पीजीआई प्रशासन अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित पदों को अवैध रूप से समाप्त कर रहा है। साथ ही संस्थान केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत आरक्षण रोस्टर को फिर से तैयार करने में भी असमर्थ रहा है। अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण पर संसदीय समिति के सदस्य चंद्रशेखर ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कुल स्वीकृत पदों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के लिए आरक्षित पदों, तथा आरक्षित श्रेणियों के योग्य उम्मीदवारों को उपयुक्त/पात्र नहीं पाया गया घोषित करने में विफलता के बारे में चिंता जताई। उन्होंने अपने पत्र में आगे उल्लेख किया कि अनारक्षित (यूआर) श्रेणी को आरक्षित पदों के इस अवैध आवंटन के परिणामस्वरूप 141 आरक्षित पदों को अनारक्षित उम्मीदवारों से भरा जा रहा है। सदस्य ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि वे भर्ती और साक्षात्कार प्रक्रिया को तब तक रोके रखें जब तक कि आरक्षण रोस्टर को सीईआई अधिनियम 2019 के अनुपालन में ठीक से पुनर्गठित नहीं कर दिया जाता।
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टल गया साक्षात्कार
पीजीआई ने सहायक प्रोफेसरों के लिए 124 पदों के लिए विज्ञापन दिया था, जिसके लिए साक्षात्कार 19 और 22 अक्तूबर को होना था। पिछले महीने पीजीआई के एक संकाय ने ओबीसी के कल्याण के लिए संसदीय समिति के अध्यक्ष गणेश सिंह को एक पत्र में अवगत कराया था कि पीजीआई के रिकॉर्ड के अनुसार पीजीआई में सहायक प्रोफेसरों के 652 स्वीकृत पद हैं। इसके अलावा 141 आरक्षित पदों पर अनारक्षित श्रेणी का कब्जा है, जिससे आरक्षित श्रेणी के 153 पदों की कमी हो गई है। शिकायत पत्र में बताया गया है कि पीजीआई के 2021 के रिकॉर्ड के अनुसार, 76 सहायक प्रोफेसर नियुक्ति के लिए उपलब्ध थे, इसलिए यदि सभी रिक्त पद आरक्षित श्रेणी को दे दिए जाते हैं तो 77 पदों की कमी हो जाएगी।
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पहले भी हो चुकी है जांच
इससे पहले भी पीजीआई में एससी/एसटी के संपर्क अधिकारियों की ओर से मामले की जांच की गई थी। जांच में पाया गया था कि साल 2015 और 2016 में आयोजित भर्ती प्रक्रिया में कई बैकलॉग पद थे और आरक्षित पदों को अनारक्षित श्रेणियों में बदल दिया गया था। संपर्क अधिकारी ने पीजीआई निदेशक को लिखा था कि यह नियम है कि आरक्षित श्रेणी के पदों को तब तक अनारक्षित नहीं किया जा सकता जब तक कि कोई अत्यंत असाधारण स्थिति न हो, और वह भी संस्थान में विशेष श्रेणी के संपर्क अधिकारी, संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय, डीओपीटी और आयोग के सकारात्मक संज्ञान की आवश्यकता है और ऐसी कोई अनुमति नहीं मांगी गई है।